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जानकी पुल – A Bridge of World Literature

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पुरुष थमाते है स्त्री के दोनों हाथों में अठारह तरह के दुःख

October 12, 20131 mins0
दुर्गा के बहाने कुछ कविताएँ लिखी हैं युवा कवयित्री विपिन चौधरी ने. एक अलग भावबोध, समकालीन दृष्टि…
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    पुरुष थमाते है स्त्री के दोनों हाथों में अठारह तरह के दुःख

    October 12, 20131 mins0
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      पुरुष थमाते है स्त्री के दोनों हाथों में अठारह तरह के दुःख

      October 12, 20131 mins12
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      सचमुच आराम से चली गयी माँ

      October 11, 20133 mins13
      शिवमूर्ति हमारे समय के बेहतरीन गद्यकार हैं. उनके गद्य में जीवन को महसूस किया जा सकता है,…
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        भारतीय भाषाओं का ‘समन्वय’

        October 10, 20131 mins4
        ‘समन्वय’ के पुराने आयोजन का एक सत्र  इण्डिया हैबिटेट सेंटर के वार्षिक साहित्यिक आयोजन ‘समन्वय’ का आयोजन…
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          एक-आध दिन मौसी के घर भी चले जाना चाहिए

          October 9, 20132 mins0
          संजय गौतम कम लिखते हैं लेकिन मानीखेज लिखते हैं. उदाहरण के लिए यही लेख जिसमें इब्ने इंशा…
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            एक-आध दिन मौसी के घर भी चले जाना चाहिए

            October 9, 20132 mins0
            संजय गौतम कम लिखते हैं लेकिन मानीखेज लिखते हैं. उदाहरण के लिए यही लेख जिसमें इब्ने इंशा…
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              एक-आध दिन मौसी के घर भी चले जाना चाहिए

              October 9, 20132 mins5
              संजय गौतम कम लिखते हैं लेकिन मानीखेज लिखते हैं. उदाहरण के लिए यही लेख जिसमें इब्ने इंशा…
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              ‘अरे! तुम! उमराव जान अदा !’

              October 8, 20131 mins5
              रोहिणी अग्रवाल एक सजग आलोचक और संवेदनशील कथाकार हैं. उनके इस लेख में उनके लेखन के दोनों…
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                दबाव आप पर तब नहीं, अब आया है

                October 5, 20131 mins0
                \’लमही सम्मान\’ के सम्बन्ध में सम्मान के संयोजक और \’लमही\’ पत्रिका के संपादक विजय राय द्वारा यह…
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