लेखिका ज्योत्स्ना मिलन के लेखन, उनकी मानवीय ऊष्मा को बड़ी शिद्दत से याद कर रहे हैं प्रसिद्ध कवि-लेखक, ‘समास’ पत्रिका…
ज्योत्स्ना जी हम सब की उम्र का होकर जीना जानती थी
ज्योत्स्ना मिलन के जाने से जो शून्य साहित्यिक जगत में पैदा हुआ है उसे कुछ शब्दों से भरने की…
इस तरह निकली घर से जैसे कभी लौटना न हो
ज्योत्स्ना मिलन जी का जाना साहित्य से उस मानवीयता का जाना है जो अब साहित्यिक परिसर में धीरे धीरे विरल…
यह उपन्यास हर उस व्यक्ति के लिए है जिसने कभी प्यार की चाह की हो
अंग्रेजी लेखिका मीनाक्षी ठाकुर का उपन्यास ‘लवर्स लाइक यु एंड आई’ प्रेम पत्रों के संग्रह की तरह है जिसे आप पलटने लगें और और…
लहर का पता नहीं. अगर थी तो सब उसमें नहीं बहे
वरिष्ठ लेखकों-कवियों का धर्म केवल व्यास सम्मान, ज्ञानपीठ पुरस्कार हासिल करना भर नहीं होता है. उनका बड़ा काम समकालीन लेखकों…
मृत्यु की प्रतीक्षा में जीवन
अपने घर के आंगन में विनोद जमलोकी। आपके पीछे जो वनस्पतियां दिख रही हैं वहां भू-स्खलन से पहले एक…
मई दिवस पर एक जर्मन कहानी हिंदी अनुवाद में
आज मई दिवस पर प्रस्तुत है कहानी ‘तृप्त मछुआरा’, जो जर्मन भाषा के नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक हाइनरिश ब्योल की है.…
वाम के समक्ष साख का संकट है या फिर नेतृत्व का?
लेखक-पत्रकार अनंत विजय का यह पत्र कल ‘जनसत्ता’ में छपा था. सीपीएम के महासचिव प्रकाश करात के नाम. वाम राजनीति…
वी एस नायपाल के उपन्यास ‘गुरिल्लाज’ का पाठ
हाल में वी.एस. नायपॉल के कई उपन्यासों के हिंदी अनुवाद पेंगुइन से छपकर आये, जिनमें उनका एक महत्वपूर्ण उपन्यास ‘गुरिल्लाज’…
बदलते दौर की रूढ़ियों की पहचान
हिंदी प्रकाशन जगत की समस्त घटनाएं दिल्ली में ही नहीं होती हैं. कुछ अच्छी पुस्तकें केंद्र से दूर परिधि से…



