मार्केज़ के अनुवादों को लेकर किसी से खूब चर्चा हुई तो मुझे याद आया कि उनकी एक कहानी का सुन्दर अनुवाद…
वाम दिशा में ढलता सूरज
आज ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में वरिष्ठ पत्रकार, कवि कार्टूनिस्ट राजेन्द्र धोड़पकर का यह लेख प्रकाशित हुआ है. जिन्होंने न पढ़ा हो उनके…
श्रेष्ठ कृतियों की सूची बनाकर उनका बार-बार अध्ययन करना चाहिए
‘वागर्थ’ पत्रिका के मई अंक में एक परिचर्चा प्रकाशित हुई है ‘समकालीन कथा साहित्य और बाजार’ विषय पर. इसमें मैंने…
मैं भारत में नहीं रहता हूं मैं अपने घर में रहता हूं
महीनों से चल रहे चुनावी चक्र से बोर हो गए हों, राजनीतिक महाभारत से ध्यान हटाना चाहते हों तो कुछ…
हाथी-घोड़ा-पालकी
लोकसभा चुनाव संपन्न हुए, हार-जीत तय हो गई. आज कई अखबारों में चुनाव परिणामों का विश्लेषण देखा-पढ़ा. ‘जनसत्ता’ संपादक ओम…
‘गायब होता देश’ पर मैत्रेयी पुष्पा की टिप्पणी
अपने पहले उपन्यास ग्लोबल गांव के देवता के चर्चित और बहुप्रशंसित होने के बाद रणेन्द्र अपने दूसरे उपन्यास गायब…
वह आत्मविश्वास की मौत मरेगा
आज हमारे लोकतंत्र के महासमर का आखिरी मतदान चल रहा है. आइये रवि भूषण पाठक की कुछ राजनीतिक कवितायेँ पढ़ते…
फिर तोड़ने की कोशिश हर ओर हो रही है
भरत तिवारी की जादुई तस्वीरों के हम सब प्रशंसक रहे हैं. उनकी गज़लों की रवानी से भी आप प्रभावित हुए…
एरिश फ्रीड की कविताओं का मूल जर्मन से अनुवाद
एरिश फ्रीड (6 मई, 1921 – 22 नवंबर, 1988) ऑस्ट्रियाई मूल के कवि, लेखक, निबंधकार और अनुवादक थे. प्रारम्भ में…
संजीव क्षितिज की कविताएं
संजीव क्षितिज दुर्लभ कवि हैं. बरसों बाद उनकी कुछ कविताएं ‘समास’ पत्रिका में पढ़ी तो आपस साझा करने से खुद…



