चलन्तिका टीकाओं का पूरा अर्थशास्त्र बदल चुका है

संजीव कुमार हमारे दौर बेहतरीन गद्यकार हैं. उनका यह वृत्तान्त एक सिनेमा हॉल के बहाने पटना के आधुनिक-उत्तर-आधुनिक होने की…

चलन्तिका टीकाओं का पूरा अर्थशास्त्र बदल चुका है

संजीव कुमार हमारे दौर बेहतरीन गद्यकार हैं. उनका यह वृत्तान्त एक सिनेमा हॉल के बहाने पटना के आधुनिक-उत्तर-आधुनिक होने की…

\’किस्मत\’ आज भी एक प्रासंगिक फिल्म है

ज्ञान मुखर्जी की फिल्म \’किस्मत\’ १९४० में रिलीज हुई थी. इसे हिंदी का पहला \’ब्लॉकबस्टर मूवी\’ कहा जाता है. उस…

‘किस्मत’ आज भी एक प्रासंगिक फिल्म है

ज्ञान मुखर्जी की फिल्म ‘किस्मत’ १९४० में रिलीज हुई थी. इसे हिंदी का पहला ‘ब्लॉकबस्टर मूवी’ कहा जाता है. उस…

क्या \’पुंडलीक\’ भारत की पहली फीचर फिल्म थी?

१९१२ में बनी फिल्म \’पुंडलीक\’ क्या भारत की पहली फीचर फिल्म थी? दिलनवाज का यह दिलचस्प लेख उसी फिल्म को…

क्या ‘पुंडलीक’ भारत की पहली फीचर फिल्म थी?

१९१२ में बनी फिल्म ‘पुंडलीक’ क्या भारत की पहली फीचर फिल्म थी? दिलनवाज का यह दिलचस्प लेख उसी फिल्म को…

मुक्तिबोध की एक आरंभिक कहानी \’सौन्‍दर्य के उपासक\’

मगहिवि के वेबसाईट हिंदी समय को देख रहा था तो अचानक मुक्तिबोध की १९३५ में प्रकाशित इस कहानी पर ध्यान…

मुक्तिबोध की एक आरंभिक कहानी ‘सौन्‍दर्य के उपासक’

मगहिवि के वेबसाईट हिंदी समय को देख रहा था तो अचानक मुक्तिबोध की १९३५ में प्रकाशित इस कहानी पर ध्यान…

‘लोकप्रिय’ शब्द सुनते ही बौद्धिक वर्ग के कान खड़े हो जाते हैं

हिंदी में लोकप्रिय साहित्य के अध्ययन विश्लेषण के कम ही प्रयास हुए हैं. आम तौर पर उनको लुगदी साहित्य, सस्ता…

अपनी निंदा छापने के लिए साहस चाहिए

आज जनसत्ता में अपने ‘कभी-कभार’ छपने वाले स्तंभ ‘अनंतर’ में संपादक ओम थानवी ने उस बहस पर अपनी तरफ से…

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