मशहूर जर्मन कवि और लेखक राइनेर मारिया रिल्के, जो 1875 से 1926 तक हमारे बीच रहे। रिल्के की ज़िन्दगी एक बेचैन…
नामवर सिंह पर कमलेश्वर का लेख
यह नामवर सिंह के जन्म का महीना है. आज भी हिंदी की सबसे बड़ी पहचान नामवर सिंह ही हैं.…
नामवर सिंह पर कमलेश्वर का लेख
आज मूर्धन्य आलोचक नामवर सिंह की जयंती है. आज भी हिंदी की सबसे बड़ी पहचान नामवर सिंह ही हैं. यह…
कला कलाकार की असल पूंजी है
अभिनेता बलराज साहनी हिन्दी सिनेमा की एक महान व अविस्मरणीय शख्सियत रहे हैं। 1 मई 1913 को पैदा हुए अभिनेता के जन्मशताब्दी…
देखना होगा कि ऐसे कटघरे कहाँ-कहाँ हैं?
वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के लेख पर पहले कवि-संपादक गिरिराज किराडू ने लिखा. अब उनके पक्ष-विपक्षों को लेकर कवि-कथाकार-सामाजिक कार्यकर्ता…
संतों घर में झगरा भारी!
कल हमने जनसत्ता संपादक ओम थानवी का लेख ‘आवाजाही के हक में‘ जनसत्ता से साभार लगाया था. फेसबुक और ब्लॉग्स पर गुंटर…
आवाजाही के हक में
आज ‘जनसत्ता’ के संपादक ओम थानवी ने ‘अनंतर’ में इंटरनेट माध्यम पर चली कुछ बहसों के माध्यम से इस माध्यम…
हमारी ज़ोहरा आपा
आज जोहरा सहगल ने अपने जीवन का शतक पूरा कर लिया. उनके जीवन और कला के सफर पर दिलनवाज ने…
क्या सचमुच लेखक की भूमिका भौंकते हुए कुत्ते सरीखी है?
साहित्यिक पत्रिका ‘तद्भव’ द्वारा लखनऊ में 21 व 22 अप्रैल को सेमिनार का आयोजन हुआ, जिसमें आदरणीय नामवर सिंह और…



