मैं मनुष्य ही बने रहना चाहता हूँ- विश्वनाथ त्रिपाठी

हाल में ही प्रसिद्ध आलोचक, लेखक और सबसे बढ़कर एक बेजोड़ अध्यापकविश्वनाथ त्रिपाठी ने अपने जीवन के 80 साल पूरे…

मैं मनुष्य ही बने रहना चाहता हूँ- विश्वनाथ त्रिपाठी

हाल में ही प्रसिद्ध आलोचक, लेखक और सबसे बढ़कर एक बेजोड़ अध्यापकविश्वनाथ त्रिपाठी ने अपने जीवन के 80 साल पूरे…

एक विदेशी की नज़र में एशिया की रेलयात्राएं

  हाल में ही पेंगुइन-यात्रा प्रकाशन से प्रसिद्ध लेखक पॉल थरू की किताब \’द ग्रेट रेलवे बाज़ार\’ इसी नाम से…

एक विदेशी की नज़र में एशिया की रेलयात्राएं

  हाल में ही पेंगुइन-यात्रा प्रकाशन से प्रसिद्ध लेखक पॉल थरू की किताब ‘द ग्रेट रेलवे बाज़ार’ इसी नाम से…

अज्ञेय के साहित्य के प्रति उदासीनता के पीछे क्या वजह रही?

अज्ञेय की जन्मशताब्दी के अवसर पर आज प्रसिद्ध आलोचक मदन सोनी का यह लेख जिसमें उन्होंने उस पोलिमिक्स को समझने-समझाने…

प्रेम की भूमि पर हमने घृणा को भी पलते हुए देखा.

‘इकोनोमिक एंड पोलिटिकल वीकली’ में पत्रकारिता से कैरियर शुरु करने वाले रुस्तम मूलतः कवि-दार्शनिक हैं. हिंदी कविता में उनका स्वर…

लिखना एक आत्मघाती पेशा है

क्यों लिखता हूँ?… जाने क्यों इस सोच के साथ मुझे मुझे अक्सर नवगीतकार रामचंद्र चंद्रभूषण याद आते हैं. डुमरा कोर्ट,…

सिनेमा में हिंदी प्रदेशों को अपराध के पर्याय के रूप में ही क्यों दर्शाया जाता है?

प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम ने अपने इस लेख में यह दिखाया है कि किस तरह हिंदी सिनेमा में पंजाब…

न मैं काठ की गुड़िया बनना चाहती हूँ न मोम की

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है. इस अवसर पर प्रस्तुत हैं आभा बोधिसत्व की कविताएँ- जानकी पुल. मैं स्त्री मेरे पास…

न मैं काठ की गुड़िया बनना चाहती हूँ न मोम की

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है. इस अवसर पर प्रस्तुत हैं आभा बोधिसत्व की कविताएँ- जानकी पुल. मैं स्त्री मेरे पास…

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