Posted in ब्लॉग पर्वत पर्वत धारा फूटे लोहा मोम सा गले रे साथी Estimated read time 1 min read Posted on August 21, 2011 by गोरख पांडे क्रांति के कवि थे. आज जनांदोलन के इस दौर में उनकी कुछ कविताएँ ध्यान आईं. आप भी पढ़िए-…