साहित्य एक टक्कर है। एक्सीडेंट है।

प्रसिद्ध आलोचक सुधीश पचौरी ने इस व्यंग्य लेख में हिंदी आलोचना की(जिसे मनोहर श्याम जोशी ने अपने उपन्यास ‘कुरु कुरु…

इंटरनेट है तो फ्रेंडशिप है फ्रेंडशिप है तो शेयरिंग है

कल ‘जनसत्ता’ में सुधीश पचौरी का यह लेख आया था. जिन्होंने नहीं पढ़ा हो उनके लिए इसे साझा कर रहा…

हिंदी में हंसना अंग्रेजी में हंसने से अलग है

  उत्तर आधुनिकता के विद्वान सुधीश पचौरी जिस विषय पर लिखते हैं उसका एक नया ही पाठ बना देते हैं-…

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Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी