प्रभात त्रिपाठी और गीतांजलि श्री को वैद सम्मान

चौथा और पाँचवाँ वैद सम्मान क्रमशः प्रभात त्रिपाठी और गीतांजलि श्री को दिये जाने की घोषणा हुई है। यह सम्मान हिन्दी के वरिष्ठ लेखक कृष्ण बलदेव वैद के नाम पर दिया जाता है। पिछले साल किन्हीं कारणों से यह सम्मान नहीं दिया जा सका था। इसलिए इस बार दो सालों के पुरस्कारों की घोषणा एक साथ की गई है। इससे पहले तीन लेखकों को यह सम्मान दिया जा चुका है। पहला वैद सम्मान लेखक ध्रुव शुक्ल को दिया गया था, दूसरा सम्मान उदय प्रकाश को दिया गया था और तीसरा सम्मान पर्यावरणविद अनुपम मिश्रा को। पुरस्कार स्वरूप एक लाख रुपये की राशि दी जाती है।
प्रभात त्रिपाठी वरिष्ठ लेखक, कवि, आलोचक हैं। उन्होने एक जमाने में मध्य प्रदेश सरकार की पत्रिका ‘साक्षात्कार’ का सम्पादन भी किया था। गीतांजलि श्री मूलतः कहानियाँ, उपन्यास लिखती हैं। उनके उपन्यासों माई, हमारा शहर उस बरस की विशेष चर्चा हुई थी। अपने गद्य की ऊष्मा से उन्होने हिन्दी में अपना एक विशेष पाठक वर्ग बनाया है।

यह पुरस्कार प्रसिद्ध युवा चित्रकार मनीष पुष्कले द्वारा दिया जाता है।

दोनों पुरस्कृत लेखकों को जानकी पुल के पाठक परिवार की ओर से बधाई!

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