एक अभिशप्त मिथक थे हुसैन
आज एम.एफ. हुसैन की बरसी है. यह लेख मैंने पिछले साल उनके निधन के बाद लिखा था.…
हिंदी लेखकों का गुस्सा क्या अपने अहं की तुष्टि तक ही होता है?
अभी इतवार को प्रियदर्शन का लेख आया था, जिसमें गौरव-ज्ञानपीठ प्रकरण को अधिक व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने…
\’कथा\’ पत्रिका का पुनर्प्रकाशन
\’कथा\’ पत्रिका का नाम आते ही मार्कंडेय जी याद आते हैं. यह खुशी की बात है कि…
चलन्तिका टीकाओं का पूरा अर्थशास्त्र बदल चुका है
संजीव कुमार हमारे दौर बेहतरीन गद्यकार हैं. उनका यह वृत्तान्त एक सिनेमा हॉल के बहाने पटना के…
\’किस्मत\’ आज भी एक प्रासंगिक फिल्म है
ज्ञान मुखर्जी की फिल्म \’किस्मत\’ १९४० में रिलीज हुई थी. इसे हिंदी का पहला \’ब्लॉकबस्टर मूवी\’ कहा…
क्या \’पुंडलीक\’ भारत की पहली फीचर फिल्म थी?
१९१२ में बनी फिल्म \’पुंडलीक\’ क्या भारत की पहली फीचर फिल्म थी? दिलनवाज का यह दिलचस्प लेख…
मुक्तिबोध की एक आरंभिक कहानी \’सौन्दर्य के उपासक\’
मगहिवि के वेबसाईट हिंदी समय को देख रहा था तो अचानक मुक्तिबोध की १९३५ में प्रकाशित इस…
हिंदी के वरिष्ठ लेखक सार्वजनिक बयान देने से क्यों बचते-डरते है?
ज्ञानपीठ-गौरव प्रकरण में खूब बहस चली, आज भी चल रही है. आशुतोष भारद्वाज ने उस प्रकरण के…

