फणीश्वरनाथ रेणु का दुर्लभ रिपोर्ताज ‘जय गंगा!’

महान गद्यकार फणीश्वर नाथ रेणु जी का यह दुर्लभ रिपोर्ताज जय गंगा   प्रस्तुत है- जो रेणु रचनावली में भी…

निलय उपाध्याय और मुंबई की लोकल

निलय उपाध्याय ठेठ हिंदी के कवि हैं. उनकी कविताओं में वह जीवन्तता है जिससे पता चलता है कि वे जीवन…

यह उम्मीद है जो हमें बचाए रखती है

प्रियदर्शन मूलतः कवि हैं और हाल के दिनों में कविता में जितने प्रयोग उन्होंने किए हैं शायद ही किसी समकालीन…

इस आयोजन में कई परंपराएं टूटी हैं

हमारे प्रिय लेखक असगर वजाहत ने पटना लिटरेचर फेस्टिवल के बहाने साहित्य और सत्ता के संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण…

इस आयोजन में कई परंपराएं टूटी हैं

हमारे प्रिय लेखक असगर वजाहत ने पटना लिटरेचर फेस्टिवल के बहाने साहित्य और सत्ता के संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण…

जिसने औपनिवेशिक भाषा को औपनिवेशिक अहंकार से मुक्त करवाया

महान लेखक चिनुआ अचीबे को श्रद्धांजलि देते हुए यह लेख मैंने यह लेख लिखा था, जो कल \’दैनिक हिन्दुस्तान\’ में…

दिन एक सितम, एक सितम रात करो हो

पटना लिटरेचर फेस्टिवल में जो लोग शामिल हुए उनके लिए शायर कलीम आजिज़ को सुनना भी एक यादगार अनुभव रहा.…

\’उम्र से लंबी सड़कों पर\’ गुलजार

गुलजार के गीतों पर केंद्रित विनोद खेतान की पुस्तक आई है \’उम्र से लंबी सड़कों पर\’. इस पुस्तक के बहाने…

‘उम्र से लंबी सड़कों पर’ गुलजार

  गुलजार के गीतों पर केंद्रित विनोद खेतान की पुस्तक आई है ‘उम्र से लंबी सड़कों पर’. इस पुस्तक के…

मेरी उँगलियों को जुगनू पहनने पड़ते हैं: मीनाक्षी ठाकुर की कविताएँ

मीनाक्षी ठाकुर की कविताओं में जीवन के एकांत हैं, छोटे-छोटे अनुभव हैं और आकुल इच्छाएं. सार्वजनिक के निजी वृत्तान्त की…

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