जिसे मिला तो सब कुछ मगर देर सेSeptember 11, 2024September 11, 20251 mins0मुक्तिबोध के निधन और उनके अंतिम संस्कार पर यह दुर्लभ रपट लिखी है मनोहर श्याम जोशी ने,…स्मरण prabhatcontinue Reading..
बलात्कार, कुछ दिन का शोर और फिर चुप्पी ही चुप्पीSeptember 9, 2024September 9, 20241 mins0इस समाज में स्त्री कहाँ सुरक्षित है? घर, बाहर, शिक्षण संस्थान या कोई भी संस्थान, पुलिस स्टेशन,…Blog prabhatcontinue Reading..
यूरी बोत्वींकिन के नाटक ‘अंतिम लीला’ का अंशSeptember 8, 2024September 8, 20245 mins0आज जानकी पुल की विशेष प्रस्तुति मनीषा कुलश्रेष्ठ द्वारा- ============================== यूरी बोत्वींकिन मेरे फ़ेसबुक मित्र काफी समय से रहे हैं,…कथा-कहानी prabhatcontinue Reading..
आदित्य रहबर की कविताएँSeptember 8, 2024September 8, 20241 mins0आदित्य रहबर की कविताएँ बेहद प्रभावी हैं। आज प्रत्येक व्यक्ति जिसने अपनी सोचने-समझने की शक्ति को बचाई,…कविताएं prabhatcontinue Reading..
गरिमा जोशी पंत की कहानी ‘गुठली’September 7, 2024September 7, 20241 mins0मनुष्य के मनोविज्ञान पर कब कौन सी बात किस तरह असर करती रहती है इसे समझना बेहद…कथा-कहानी prabhatcontinue Reading..
मेक्सिको के आदिवासियों का जापटिस्ट आंदोलन, भारत का समकालीन आदिवासी आंदोलन तथा आदिवासी उपन्यास: विचारधाराओं का सहियापन और स्वशासनSeptember 4, 2024September 5, 20243 mins0आज महेश कुमार का यह शोध अलेख पढिए जिसमें उन्होंने मेक्सिको के आदिवासियों के जापटिस्ट आन्दोलन का…लेख prabhatcontinue Reading..
बदलते हिंदुस्तान के ज़मीनी यथार्थ का चेहरा: कर्फ़्यू की रातSeptember 3, 2024September 3, 20241 mins0आज पढ़िए युवा लेखक शहादत के कहानी संग्रह ‘कर्फ़्यू की रात’ की समीक्षा। लिखा है वैभव शर्मा…समीक्षा prabhatcontinue Reading..
ललन चतुर्वेदी की कविताएँSeptember 1, 2024September 1, 20241 mins0ललन चतुर्वेदी की यह कविताएँ स्त्रियों के संघर्ष के विभिन्न पहलुओं की ओर ध्यान ले जाती हैं।…कविताएं prabhatcontinue Reading..
स्त्रीवादी दुविधाAugust 29, 2024August 29, 20241 mins0 यह सवाल बहुत वाजिब है कि क्या स्त्रीवादी होने का मतलब केवल स्त्री हक़ तक ही सीमित…लेख prabhatcontinue Reading..
गुलज़ार को संपूर्णता में सामने लाने वाली किताबAugust 28, 2024September 2, 20241 mins0यतीन्द्र मिश्र की किताब ‘गुलज़ार सा’ब: हज़ार राहें मुड़ के देखीं’ पर यह टिप्पणी लिखी है कवि-लेखक…समीक्षा prabhatcontinue Reading..