मनीषा कुलश्रेष्ठ के उपन्यास ‘त्रिमाया’ का एक अंश

मनीषा कुलश्रेष्ठ अपनी कृति में हमेशा ही किसी नये विचार और विषय को लेकर आने के कारण पाठकों को चौंकाती…

‘दशानन स्वप्नसिद्धि’ और ‘स्वांग –जस की तस’ का मंचन

महिंद्रा समूह और टीमवर्क आर्ट्स द्वारा आयोजित ‘महिंद्रा एक्सीलेंस इन थिएटर अवार्ड्स’ एवं फेस्टिवल का 20वाँ संस्करण दिल्ली के सांस्कृतिक…

 ‘चंदा बेड़नी’ के मंचन के साथ 20वें मेटा फेस्टिवल की शानदार शुरुआत

भारतीय रंगमंच की जीवंत परंपरा को प्रोत्साहित करने और देश भर के प्रतिभाशाली कलाकारों को एक मंच प्रदान करने के…

यादों की थिरक: नानी और दिल्ली की कुमाऊँनी होली

कुमाऊँ की होली ख़ास होती है। जब तक मेरे गुरु मनोहर श्याम जोशी जीवित थे कुमाऊँ की होली का रंग…

घण्टाकर्ण पंडित की होली विषयक कविताएँ

आज सुबह मैंने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में यह लिखा कि हिन्दी में होली विषयक कविताएँ क्यों नहीं हैं? इस पर…

नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है?

संस्कृतिकर्मी वाणी त्रिपाठी ने आज अपने स्तम्भ ‘जनहित में जारी, सब पर भारी’ में बाल साहित्य की ऐतिहासिकता और समकालीन…

संवेदनशील कहानियों का संग्रह है ‘खैबर दर्रा’

हाल में ही वरिष्ठ लेखक पंकज सुबीर का कहानी संग्रह राजपाल एंड संज प्रकाशन से आया है- खैबर दर्रा। इस…

इंटरनेशनल बुकर प्राइज के लांगलिस्ट और बानू मुश्ताक़

साल 2025 के लिए इंटरनेशनल बुकर प्राइज के लांगलिस्ट की घोषणा हो चुकी है। साल 2022 के बाद एक बार…

नारी तू नारायणी!

स्मिता सुंदरम एक शिक्षिका, शोधकर्ता और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं, जो *सस्टेनेबिलिटी, कार्बन डाइऑक्साइड बायो-सीक्वेस्ट्रेशन, और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली* पर कार्य…

दिव्या विजय की डायरी ‘दराज़ो में बंद ज़िंदगी’ का एक अंश

युवा लेखिका दिव्या विजय की कहानियाँ तो हम पढ़ते ही आये हैं। अक्सर ही उनकी कहानियाँ बिना किसी अतिरिक्त शोर…

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Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी