प्रमोद द्विवेदी की कहानी ‘बारह घंटे’

 प्रमोद द्विवेदी की कहानियाँ अपनी जीवंत भाषा और ज़बरदस्त नाटकीयता के कारण याद रह जाती है। अब यह कहानी ही…

आलोक रंजन की कहानी ‘तलईकूतल’

तलईकूतल एक प्राचीन और अमानवीय प्रथा है, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु में प्रचलित रही है, जिसमें…

कोमलता के साथ थोड़े खुरदुरेपन को साधती कहानियाँ

हाल में युवा लेखिका दिव्या विजय का कहानी संग्रह आया है ‘तुम बारहबानी’। इस संग्रह की बहुत सारगर्भित भूमिका लिखी…

बसंत के आग्रह का कवि: पी बी शेली

महान रोमांटिक कवि पी बी शेली की कविताओं पर यह लेख लिखा है युवा कवि अंचित ने। आप भी पढ़…

रमाकान्त रथ की कविताएँ

उड़िया भाषा के प्रसिद्ध कवि रमाकान्त रथ का कल भुबनेश्वर में निधन हो गया। उनको साहित्य अकादमी पुरस्कार समेत अनेक…

मनीषा कुलश्रेष्ठ के उपन्यास ‘त्रिमाया’ का एक अंश

मनीषा कुलश्रेष्ठ अपनी कृति में हमेशा ही किसी नये विचार और विषय को लेकर आने के कारण पाठकों को चौंकाती…

‘दशानन स्वप्नसिद्धि’ और ‘स्वांग –जस की तस’ का मंचन

महिंद्रा समूह और टीमवर्क आर्ट्स द्वारा आयोजित ‘महिंद्रा एक्सीलेंस इन थिएटर अवार्ड्स’ एवं फेस्टिवल का 20वाँ संस्करण दिल्ली के सांस्कृतिक…

 ‘चंदा बेड़नी’ के मंचन के साथ 20वें मेटा फेस्टिवल की शानदार शुरुआत

भारतीय रंगमंच की जीवंत परंपरा को प्रोत्साहित करने और देश भर के प्रतिभाशाली कलाकारों को एक मंच प्रदान करने के…

यादों की थिरक: नानी और दिल्ली की कुमाऊँनी होली

कुमाऊँ की होली ख़ास होती है। जब तक मेरे गुरु मनोहर श्याम जोशी जीवित थे कुमाऊँ की होली का रंग…

घण्टाकर्ण पंडित की होली विषयक कविताएँ

आज सुबह मैंने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में यह लिखा कि हिन्दी में होली विषयक कविताएँ क्यों नहीं हैं? इस पर…

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