आज पढ़िए वरिष्ठ लेखक उदयन वाजपेयी के कहानी संग्रह ‘पिराउद’ पर यह टिप्पणी। लिखा है कुमारी रोहिणी ने। रोहिणी कोरियन…
Category: समीक्षा
मौलिकता, प्रासंगिकता और इतिहास कसौटी पर ‘मतलब हिन्दू’
आज पढ़िए अम्बर पाण्डेय के उपन्यास ‘मतलब हिन्दू’ पर यह टिप्पणी। लिखा है डॉ कुमारी रोहिणी ने। वाणी प्रकाशन से…
पुस्तक समीक्षा: काँच की गेंद में सपने
हाल ही में प्रीति जायसवाल का पहला काव्य संग्रह ‘काँच की गेंद में सपने’ प्रकाशित हुआ है। इस किताब की…
प्रेम में आत्माभिव्यक्ति: लौ
हाल ही में बाबुषा कोहली का नया उपन्यास आया है ‘लौ’। इसकी बेहद गंभीर व बारीक समीक्षा कर रहे हैं…
गगन गिल की कविताएँ : स्त्री के भीतर स्त्री की तलाश
अम्बुज पाण्डेय अपनी आलोचना और टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। गगन गिल की कविताओं पर उनका आलेख पाठकों के…
आहोपुरुषिका – सनातन विचार मेँ विवाह
वागीश शुक्ल अपने अद्वितीय निबन्धों, टीकाओं और अपने लिखे जा रहे उपन्यास के लिए प्रसिद्ध हैं। वे सम्भवतः हिन्दी के…
सूखा बरगद : धार्मिक कट्टरता के बीच उम्मीद की एक किरण
कुछ कृतियों की प्रासंगिकता लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसी ही एक कृति मंज़ूर एहतेशाम का उपन्यास ‘सूखा…
नन्द चतुर्वेदी रचनावली पर प्रणव प्रियदर्शी की टिप्पणी
हाल में ही राजकमल प्रकाशन से नन्द चतुर्वेदी की रचनावली प्रकाशित हुई है। चार खंडों में प्रकाशित इस रचनावली का…
मस्ट रीड है ‘देह ही देश’
गरिमा श्रीवास्तव ने बहुत लिखा है। बहुत महत्वपूर्ण अकादमिक लेखन किया है। लेकिन उनकी किताब ‘देह ही देश’ का अलग…
मनोज रुपड़ा के उपन्यास ‘काले अध्याय’ पर यतीश कुमार
मनोज रुपड़ा हमारे दौर के बड़े विजन वाले लेखक हैं। उनके उपन्यास ‘काले अध्याय’ के बारे में हाल में वरिष्ठ…



