बग़ैर शब्दों के बोलना है एक भाषा में

पीयूष दईया की कविताओं को किसी परंपरा में नहीं रखा जा सकता. लेकिन उनमें परंपरा का गहरा बोध है. उनकी…

जीवन को छलता हुआ, जीवन से छला गया

आज मोहन राकेश का जन्मदिन है. हिंदी को कुछ बेजोड़ नाटक और अनेक यादगार कहानियां देने वाले मोहन राकेश ने यदा-कदा…

ये लोकतंत्र के महामठ की चंद सीढियां हैं

तुषार धवल की कविताओं में वह विराग है जो गहरे राग से पैदा होता है. लगाव का अ-लगाव है, सब…

एक राष्ट्र के रूप में हम संकट में हैं

सीएनएन-आईबीएन की पत्रकार रूपाश्री नंदा से बातचीत करते हुए लेखिका अरुंधती राय ने कहा कि उनको इस बात की कभी…

तुम अकेले नहीं हो विनायक सेन

कवि और वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र राजन ने अभी-अभी एक कविता भेजी है. विनायक सेन को अदालती सजा ने हम-आप जैसे…

विकीलिक्स के खुलासों पर मारियो वर्गास ल्योसा का बयान

इस साल साहित्य के नोबेल पुरस्कार प्राप्त लेखक मारियो वर्गास ल्योसा अपने जीवन, लेखन, राजनीति सबमें किसी न किसी कारण…

माँ मिथिले, यह अंतिम प्रणाम

यह बताने की आवश्यकता नहीं लगती है कि नागार्जुन वैद्यनाथ मिश्र के नाम से मैथिली में कविताएँ लिखते थे और…

आठ तारीख आठ लेखक आठ उपन्यास

दो सालों से हिंदी में उपन्यासों को लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही थी. चर्चा के केद्र में नए-नए कथा-कथा…

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