युवा कवि अमृत रंजन की पाँच कविताएँ

अमृत रंजन की कविताएँ हम तब से पढ़ते आ रहे हैं जब वह 12 साल का बच्चा था। अब वह युवा हो चुका है। उसकी कविताओं में भी अलग तरह की परिपक्वता दिखाई देने लगी है। बड़ी संभावनाएँ दिखाई देने लगी हैं। आज अमृत का जन्मदिन है। आइए उसकी कविताएँ पढ़ते हैं उसको शुभकामनाएँ देते हैं-
====================
 
1.
 
प्यारी जून
 
 
धुँधले शीशे के बीच
सारा आसमान तुम्हारा है।
लाल टमाटर
लाल शहद की तरह
और खून,
सब तुम्हारा है।
आओ मेरे क़रीब कल,
दोपहर के पीछे
आईनों से छुपाकर!
मेरा सन्नाटा तुम्हारा है।
 
——————
 
 
 
 
2.
 
धीमा
 
 
गुलाबी आसमाँ पर चढ़,
काले समंदर में डूबना चाहता हूँ।
यह हँसी नक़ली मालूम पड़ती है।
क्या मिला है तुम्हारी साँस में?
बताओ गुनाहगार।
चोर।
बताओ मेरे घुटने क्यों थरथराते हैं।
बताओ!
मेरा दिल इतना धीरे क्यों धड़कता है?
भीख माँगता हूँ
तुम्हारे आदेश का प्यारा हूँ,
इस मुस्कान को दूर ले जाओ।
 
——————
 
 
 
 
3.
 
चुप।
 
 
बादलों को तैरते देखो,
सफ़ेद केकड़ों की तरह उड़ रहे हैं।
देखो कितना नक़ली है!
कैसे खेल खेल रहा है,
जवाब रखने वाला।
आज-कल ये बादल थोड़े ज़्यादा सफ़ेद लगते हैं।
आज-कल सूरज थोड़ा ज़्यादा सुनहरा लगता है।
रास्ते में जो हवा चली थी,
याद है?
वो हवा जो जलेबी वाले की दुकान को ठेलते हुए आती है?
वो हवा थोड़ी ज़्यादा मीठी थी।
थोड़ी ज़्यादा ठंडी।
जैसे कोई मेरे शरीर को चूम रहा है।
इन सब में क्या असली था?
कौन यह खेल खेल रहा है?
 
——————
 
 
 
4.
 
पकड़ो मेरी आवाज़ को
 
 
अहसास दोहराने की कोशिश जारी है।
राख से धुले फूल घूरते हैं।
शीशे का बना आसमान गिर रहा है।
अब भी पकड़ने की कोशिश करती हो?
उखड़ते पेड़ों को,
थमीं साँस को,
लाल पानी को।
जायज़ नहीं है इस दुनिया का जीवन।
 
——————
 
 
 
 
5.
 
सब के बीच में
 
 
एक रात एक बजे
हवा और दीवार तोड़ते हुए,
तुम्हारा एक हिस्सा मुझ में मिल गया।
उस रात एक बजे,
मैं तुम्हारा गुलाम था।
तुम मेरे लिए पानी थी, छत थी,
तुम्हें अपनी कहानी बना लिया।
उस रात एक बजे,
तुम मेरा मक़सद थी।
मेरी शुरुआत और मेरा अंत।
और उसके बीच में सब कुछ।
==============================दुर्लभ किताबों के PDF के लिए जानकी पुल को telegram पर सब्सक्राइब करें

https://t.me/jankipul

More From Author

दीपक शर्मा की कहानी ‘चमड़े का अहाता’

‘पितृ-वध’ से निकलता स्त्री-स्वर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जानकी पुल को सहयोग करें

Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी