मिहिर पांड्या सिनेमा पर जो लिखते बोलते हैं उससे उनकी उम्र की तरफ़ ध्यान नहीं जाता। हिंदी में इस विधा…
भविष्य का समाज: सहजीविता के आयाम: जसिंता केरकेट्टा
जसिंता केरकेट्टा कवयित्री हैं, आदिवासी समाज की मुखर आवाज़ हैं। राजकमल स्थापना दिवस के आयोजन में 28 फ़रवरी…
‘फैन कल्चर’ का दौर : भविष्य का आलोचक:मृत्युंजय
मृत्युंजय कवि हैं और कविता के हर रूप में सिद्धहस्त हैं। सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तरह की आलोचना में समान…
कला ही ऐसा माध्यम है जो हमें अपने अंतःकरण की प्रस्तुति करने में समर्थ बनाता है: जिज्ञासा लाबरू
राजकमल स्थापना दिवस पर आयोजित ‘भविष्य के स्वर’ आयोजन में पहली बार जिज्ञासा लाबरू को सुना। हम हिंदी वाले बाहर…
किस्सागोई : वाचिक परंपरा का नया दौर:हिमांशु बाजपेयी
राजकमल स्थापना दिवस पर आयोजित ‘भविष्य के स्वर’ में एक वक्तव्य प्रसिद्ध दास्तानगो हिमांशु बाजपेयी का भी था। हिंदुस्तानी की…
पॉपुलर बनाम पॉपुलिस्ट: आख्यान की वापसी: चंदन पाण्डेय
कल राजकमल प्रकाशन का 73 वाँ स्थापना दिवस समारोह था। इस अवसर पर भविष्य के स्वर के अंतर्गत अलग अलग…
प्रमोद द्विवेदी की कहानी ‘वन वे प्रेम कथा’
प्रमोद द्विवेदी पत्रकार हैं और ‘जनसत्ता’ अख़बार में फ़ीचर संपादक रहे हैं। उन्होंने कहानियाँ कम लिखी हैं लेकिन बहुत रसदार…
मुक्ति शाहदेव की कुछ कविताएँ
मुक्ति शाहदेव पेशे से अध्यापिका हैं। राँची में रहती हैं। उनका पहला कविता संग्रह प्रकाशित हुआ है ‘आँगन की गोरैया’।…
अनुकृति उपाध्याय का व्यंग्य ‘मेला देखन मैं गई’
‘जापानी सराय’ की लेखिका अनुकृति उपाध्याय ने इस बार व्यंग्य लिखा है। फागुन में साहित्य महोत्सवों की संस्कृति पर एक…
अभिषेक रामाशंकर की कहानी ‘लूट’
युवा लेखक अभिषेक रामाशंकर की कविताओं से तो मैं प्रभावित था, आज उनकी यह कहानी भी पढ़ी। आप भी पढ़िए-…



