हाल में ही एक किताब आई है ‘मेरे मंच की सरगम’. इसमें वे गीत संकलित हैं जो पीयूष मिश्रा ने…
कोई बहेलिया जाल फैलाता है, एक गंधर्व गाता है
आज सुबह ‘जनसत्ता’ में प्रियदर्शन की कविताएं पढ़ी. कुछ कविताएं ऐसी होती हैं जिनको पढने सुनने का अनुभव अनिर्वचनीय होता…
दिलीप कुमार की अंग्रेजी और पेशावर में जश्न
अभी 9 जून को हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता दिलीप कुमार की आत्मकथा ‘The Substance And The Shadow’ रिलीज हुई…
‘बाघ’ कविता का एक पाठ
आम तौर पर शोध पत्र से मैं ‘जानकी पुल’ को बचाता आया हूँ. भारी-भरकम शोध निबंध से इसके टूटने का…
अमृत रंजन की कविताएं
जनवरी में हमने डीपीएस पुणे में कक्षा छह में पढने वाले बालक अमृत रंजन की कविताएं प्रकाशित की थी. अब…
इंसान मिटटी से बना है, शैतान आग से
यह मशहूर फिल्म लेखक, निर्देशक, पत्रकार ख्वाजा अहमद अब्बास की जन्म शताब्दी का साल है. उनकी आत्मकथा ‘आई ऍम नॉट…
कविताओं में भरोसा और भरोसे को लेकर कुछ कविताएँ
अनुराग अन्वेषी की कविताओं से हाल में ही परिचय हुआ और यह सच है कि उनकी कविताओं पर भरोसा बढ़ता…
हिन्दी फिल्मों का सौंदर्यशास्त्र
आइआइटी-पलट युवा लेखक प्रचण्ड प्रवीर अक्सर अपने सिनेमा ज्ञान से चमत्कृत कर देते हैं. हिंदी में में सिनेमा पर लिखने…
क्या ‘आलोचना’ नई चाल में ढलेगी?
बदलाव हमेशा नई उम्मीदों को लेकर आता है. ‘आलोचना’ पत्रिका के नए संपादक के रूप में अपूर्वानंद का नाम सुनकर…
पीयूष दईया की तीन कविताएं
पीयूष दईया समकालीन कविता में सबसे अलग आवाज रखते हैं. सफलता-असफलता के मुहावरों से दूर. उनकी कविताओं को पढना जीवन…



