बिना अपनी परम्परा को जाने उससे विद्रोह की बात काफी निरर्थक लगती है- मनोहर श्याम जोशी
मनोहर श्याम जोशी के नाम अमृतलाल नागर का पत्र
‘शुक्ल भी केवल अपने तरह के ही दिखाई पड़ते हैं, शुक्ल की तरह।’
विष्णु प्रभाकर की कहानी ‘धरती अब भी घूम रही है।’
आलोक कुमार मिश्रा की कहानी ‘दूध की जाति’
अशोक कुमार पांडेय के कविता संग्रह पर पवन करण की टिप्पणी
उनकी हार नई है ना अपनी जीत नई!
प्रमोद द्विवेदी की कहानी ‘बारह घंटे’
आलोक रंजन की कहानी ‘तलईकूतल’
जानकी पुल (Janki Pul)
लेखक-संपादक प्रभात रंजन द्वारा वर्ष 2009 में स्थापित जानकी पुल का विजन आभासी दुनिया में गंभीर और लोकप्रिय साहित्य को बढ़ावा देना तथा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा के लिए एक मंच तैयार करना है। अनुवाद के माध्यम से यह अपने विशाल हिंदी पाठकों को विश्व साहित्य उपलब्ध कराता है।
कंटेंट (Content)
जानकीपुल डॉट कॉम का उद्देश्य इंटरनेट पर श्रेष्ठ साहित्य को प्रस्तुत करना और उसका प्रसार करना है। यह युवाओं को साहित्य से जोड़ने और उनमें पढ़ने-लिखने की संस्कृति विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यही कारण है कि जानकी पुल ने सदा युवाओं के लेखन को प्राथमिकता और महत्व दिया है।
पिछले लगभग पंद्रह सालों के दौरान युवा रचनाशीलता का सबसे प्रभावी मुक़ाम जानकी पुल रहा है। हिन्दी युवा रचनाशीलता का श्रेष्ठ अंश इसी माध्यम से मुखरित हुआ है। इतना ही नहीं, हिन्दी के सभी प्रमुख विमर्श, बहसें और तकनीक को लेकर होने वाली चर्चाओं के केंद्र में भी जानकी पुल रहा है।
ऐसे दौर में जब आभासी दुनिया में गंभीर साहित्य की विदाई का नैरेटिव गढ़ा जा रहा था, जानकी पुल ने गंभीर साहित्य को अपने अनूठे प्रस्तुतीकरण के माध्यम से लोकप्रिय बनाने का काम किया। इसके लिए केवल युवा लेखकों की रचनाएँ ही प्रकाशित नहीं की गईं, बल्कि नई किताबों के परिचय, समीक्षाएं और पुस्तक अंशों के माध्यम से किताबों के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।
अनुवाद के माध्यम से दुनिया की विभिन्न भाषाओं की समकालीन चर्चित कृतियों, लेखों और अंतरराष्ट्रीय ख्याति के लेखकों की बातचीत प्रकाशित कर हिंदी जगत में विश्व साहित्य की समझ को विस्तार दिया गया है।
सहयोग (Support)
यह उल्लेखनीय है कि जानकी पुल का यह सफर बिना किसी निजी या सांस्थानिक मदद के तय किया गया है। इसका संचालन खर्च स्वयं मॉडरेटर द्वारा वहन किया जाता है। जानकी पुल लेखकों और पाठकों के रचनात्मक सहयोग से मज़बूत बना हुआ है।
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वैधानिक: जानकी पुल पर प्रकाशित रचनाओं में व्यक्त किए जाने वाले विचार पूर्णतः लेखक के निजी विचार होते हैं। उनके लिए जानकी पुल उत्तरदायी नहीं है।
