बीस साल पहले आज ही के दिन यानी 26 जुलाई, 2005 को मुंबई में हुए जल प्लावन में हजारों की…
बलराम कांवट के उपन्यास ‘मोरीला’ पर यतीश कुमार की टिप्पणी
युवा लेखक बलराम कांवट के उपन्यास ‘मोरीला’ पर यह टिप्पणी लिखी है कवि-लेखक यतीश कुमार ने। भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित…
‘वर्दी वाला गुंडा’ पर सुरेंद्र मोहन पाठक की टिप्पणी
हिन्दी में लोकप्रिय उपन्यास धारा के दो शिखर लेखक रहे- सुरेंद्र मोहन पाठक और वेद प्रकाश शर्मा। 1990 के दशक…
औपनिवेशिक ज्ञानकांड का प्रतिरोध और रामविलास शर्मा का चिंतन
अभिषेक कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में ‘19वीं सदी का हिन्दी नवजागरण: औपनिवेशिक प्रभाव या आंतरिक गति का विकास’…
एक था जाँस्कर: मानव सभ्यता की निरंतरता की गाथा
डॉ अजय सोडानी की यात्रा-कथाएँ विशिष्ट होती हैं। ख़ासकर हिमालय की यात्राओं की। यह हिमालय यात्रा की उनकी चौथी किताब…
सारंग उपाध्याय की कहानी ‘शब्द-ब्रह्म’
सारंग उपाध्याय समकालीन कहानी में समादृत नाम हैं। अपनी भाषा शैली, परिवेश के कारण उनकी कहानियाँ अलग से ही पहचान…
राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम और स्वतंत्र सिनेमा का उत्थान
भारत में जिसको कला फ़िल्म कहा जाता रहा है उसके विकास में राष्ट्रीय फ़िल्म विकास निगम का बहुत बड़ा योगदान…
प्रकृति करगेती की कहानी ‘कैकेयी कंडक्टर और ‘बस-हो-चली’-बुढ़िया’
द्वितीय जानकी पुल शशिभूषण द्विवेदी स्मृति सम्मान की शॉर्ट लिस्ट में युवा लेखिका प्रकृति करगेती का कहानी संग्रह ‘ठहरे हुए…
क़तील शिफ़ाई की कुछ ग़ज़लें
क़तील शिफ़ाई उर्दू से सर्वाधिक लोकप्रिय शाइरों में से एक थे। उनका जन्म पाकिस्तान के हज़ारा,ख़ैबर पुख़्तुंख़ुवा में 24 दिसम्बर…
उपासना की कहानी ‘एगही सजनवा बिनु ए राम!’
आज पढ़िए युवा लेखिका उपासना की कहानी- एगही सजनवा बिनु ए राम!। समकालीन कहानी में उपासना की उपस्थिति बहुत अलग और…



