चाँद! उस रात तुम कितने सुंदर लग रहे थे

स्वाति अर्जुन को हम एक सजग पत्रकार के रूप में जानते रहे हैं, वह एक संवेदनशील कवयित्री भी हैं इसका…

जाल बहेलिया ही बिछा सकता है जानवर नहीं

प्रियदर्शन की ये कविताएं प्रासंगिक भी हैं और बहुत कुछ सोचने को विवश भी करती हैं- \’जानवरों से हमें माफ़ी…

जाल बहेलिया ही बिछा सकता है जानवर नहीं

प्रियदर्शन की ये कविताएं प्रासंगिक भी हैं और बहुत कुछ सोचने को विवश भी करती हैं- \’जानवरों से हमें माफ़ी…

जाल बहेलिया ही बिछा सकता है जानवर नहीं

प्रियदर्शन की ये कविताएं प्रासंगिक भी हैं और बहुत कुछ सोचने को विवश भी करती हैं- ‘जानवरों से हमें माफ़ी…

मोनू निगम और परमानन्द जी के रोचक कारनामे

जिन दिनों आइआइटी पलट लड़के चेतन भगत के बिजनेस मॉडल को अपनाकर भ्रष्ट अंग्रेजी में बेस्टसेलर लिखकर पैसा कमाने के…

जेहन के जहान में

पेशे से प्राध्यापिका सुनीता एक संवेदनशील कवयित्री हैं. कुछ सोचती हुई, कुछ कहती हुई उनकी कविताओं का अपना मिजाज है. उनकी…

दौलत सिंह कोठारी को क्यों याद किया जाना चाहिए?

भाषा के मसले पर वर्ष 2013 की शुरूआत बड़ी विस्‍फोटक रही। कोठारी कमेटी की सिफारिशों के अनुसार वर्ष 1979 से…

दुष्यंत की कहानी \’उलटी वाकी धार\’

हाल में ही युवा लेखक दुष्यंत का कहानी संग्रह पेंगुइन से आया है \’जुलाई की एक रात\’. समकालीन जीवन के…

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Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी