क्या बाल-साहित्य सिर्फ़ बच्चों के लिए होता है! शायद नहीं। बहुत दिनों बाद कोई बाल कहानी पढ़ी, योगेश कुमार ध्यानी की ‘और रीना आज़ाद हुई’ । इसे पढ़ते हुए लगा कि समय-समय पर हम ‘बड़ों’ को भी बाल-साहित्य से जुड़े रहना चाहिए, ताकि अपने बड़े होने के दंभ से निकल कर सब के साथ सहज हो सकें। यह कहानी आप के लिए भी प्रस्तुत है – अनुरंजनी
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और रीना आजाद हुई
चिडियों का वह झुंड बस्ती से थोड़ी दूरी पर सुनसान इलाके में लगे तीन-चार पेड़ों पर रहता था। झुंड की सरदार रानी चिड़ियाँ थी। बाकी चिड़ियाँ उसी के साथ रहती थीं। रोज़ सुबह जब रानी चिड़ियाँ आवाज़ देती तो सारी चिड़ियाँ अपनी-अपनी डाल से बाहर निकलतीं और रानी चिड़ियाँ के पीछे-पीछे आकाश में उड़ने लगतीं। वे हमेशा एक निश्चित क्रम में उड़ती थीं। आकाश में उन्हें देखने पर लगता था जैसे दो पंखों वाला कोई विमान उड़ रहा हो। रानी सबसे आगे रहती और बाकी विमान के पंख के क्रम में अपनी जगह लेती थीं। कुछ दूर उड़ने के बाद यह झुंड बस्ती में बने मकानों की छत पर उतरता था। क्योंकि झुंड बहुत बड़ा होता इसलिये झुंड की चिड़ियाँ अलग-अलग समूहों में बंटकर अलग-अलग छतों पर उतरती थीं। छतों पर उन्हें खाने का दाना मिल जाता था। अगर अभी तक मकान में रहने वाले लोगों ने छत पर दाना नहीं डाला होता तो चिड़ियाँ मुंडेर पर बैठकर छत का दरवाज़ा खुलने का इन्तज़ार करतीं। दाना खाने के बाद चिड़ियाँ पानी पीने और पानी में खेलने के लिये जमीन पर किसी पानी के गड्ढे में जातीं या फिर गाय-भैंस के लिये बनी पानी की हौदी में अपने पंख भिगातीं। इसके बाद सारी चिड़ियाँ बस्ती के एक मैदान में लगे बड़े से पीपल के पेड़ पर इकट्ठा होतीं। वहाँ पर वे आपस में बात करतीं, खेलतीं और फिर आराम करती थीं। शाम होने पर रानी चिड़ियाँ आवाज़ लगाती और सारी चिड़ियाँ रानी के आस-पास इकट्ठा हो जातीं। इसके बाद रानी चिड़ियाँ सबकी गिनती करती और गिनती ठीक होने पर वो सब झुंड बनाकर अपने पेड़ो की तरफ उड़ जाया करती थीं।
लेकिन उस शाम जब रानी चिड़ियाँ ने गिनती की तो एक चिड़ियाँ कम थी। रानी चिड़ियाँ ने सबको सुबह छत पर उतरने वाले समूहों में खड़े होने को कहा। रिंकी-पिकी-चिंकी-मिली और जूली ने बताया कि उनके समूह की रीना चिड़ियाँ उनके साथ नहीं है।
दरअसल सुबह जब रिंकी-पिंकी-चिंकी-मिली-जुली और रीना एक छत पर दाना चुग रही थीं तब रीना दाने के लालच में छत के खुले दरवाज़े से अन्दर चली गयी। वो एक तीन मंजिल का बड़ा सा मकान था। रीना ने पहले कभी कोई ऐसी जगह नहीं देखी थी। वो अपने आपको रोक नहीं पाई और नीचे जाती सीढियों के ऊपर उड़ते-उड़ते बीच वाली मंजिल पर पहुंच गई।
पंखों, कुर्सियों, गुलदस्तों और कमरे की सजावट को देखते-देखते रीना बैठक में पंहुच गयी। अभी वो बैठक में घुसी ही थी कि उसे किसी के आने की आवाज़ सुनाई दी। घबराकर रीना कमरे के एक कोने में लगे फूलदान के ऊपर पत्तियों के बीच जाकर बैठ गयी। जो भी कमरे में आया था वह रीना को नहीं देख पाया। कमरे में एक मिनट रहने के बाद वो बाहर चला गया। बाहर जाते हुए उसने बैठक का दरवाज़ा बंद कर दिया। रीना ने अपने चारों तरफ देखा। कमरे में दो दरवाज़े थे लेकिन दोनों बंद। एक खिड़की थी लेकिन वह भी बंद थी। चारों तरफ से बंद कमरे में रीना को बहुत डर लग रहा था। उसे हमेशा खुले आकाश में या एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक उड़ने की आदत थी। रीना को अभी रानी चिड़ियाँ की बताई हुई बात बहुत याद आ रही थी। रानी चिड़ियाँ कहती थी, “देखो बच्चों किसी भी जगह पर अपने साथियों के बिना मत जाना और कोई चीज़ तुम्हें ललचाए तो उसमें तुम्हें फंसाने की चाल हो सकती है।” रीना घबरा रही थी और बेचैन होकर कमरे के चक्कर लगा रही थी। आखिर में थककर वह खिड़की के पास बैठ गयी। खिड़की पर पर्दा खिंचा हुआ था। रीना अपनी चोंच से खिड़की के बंद पल्ले पर आवाज़ करने लगी।
इधर रानी चिड़ियाँ ने सभी चिड़ियाओं को उस मकान के चारों तरफ उड़कर रीना का पता लगाने को कहा। रिंकी-पिंकी-चिंकी-मिली और जूली जब मकान की बालकनी के पास पंहुची तो उन्हें खिड़की से कुछ आवाज़ आई। उन्होंने रानी को बताया। रानी ने जब वह आवाज़ सुनी तो उसे भी लगा कि रीना इसी खिड़की वाले कमरे में कैद है। चिड़ियों का पूरा झुंड बालकनी में उतर गया।
रीना को कैसे बाहर निकालें, सभी इसी सोच में थीं। तभी उन्हें चींटियों की एक रेखा दिखाई दी। चीटियां एक के पीछे एक दरवाजे के नीचे की छोटी सी जगह से बाहर आ रहीं थीं। सबकी पीठ पर चीनी का एक-एक दाना था। रानी चिड़ियाँ ने चींटियों की रानी से बात की और पूछा, “तुम जिस कमरे से बाहर आ रही हो क्या वहाँ कोई चिड़ियाँ है?” रानी चींटी ने बताया कि उसने खिड़की पर एक चिड़ियाँ को देखा है। रानी चिड़ियाँ ने उसे बताया कि वो रीना है और झुंड से बिछड़ गयी है फिर उससे पूछा, “क्या तुम उस तक हमारा सन्देश पंहुचा सकती हो कि हम सब उसे निकालने की कोशिश कर रहे हैं और वो घबराये नहीं!” चींटी ने बताया कि वह इतनी ज़ोर से चिल्ला नहीं सकती कि खिड़की पर बैठी रीना सुन ले।और फिर भी वह रानी चिड़िया का सन्देश किसी तरह से रीना तक पंहुचवा देगी। रानी चींटी कमरे में वापस गयी। कमरे की दीवार के नीचे वाले हिस्से पर एक छिपकली थी जिसे चींटी जानती थी। उसने छिपकली को सारी बात बताई और छिपकली ने दीवार पर ऊपर चढ़कर खिड़की पर उदास बैठी रीना को रानी चिड़िया का संदेश दे दिया। रीना को कुछ हिम्मत मिली।
रानी चिड़ियाँ ने रानी चींटी से पूछा कि कमरे का दरवाज़ा या खिड़की कब खुलती है तो उसने बताया कि अभी मकान के लोग कहीं बाहर गये हैं और शायद देर रात से पहले नहीं लौटेंगे। रानी चिड़ियाँ चिन्तित हो गयी। उसने चींटी से फिर पूछा, “जैसे तुम लोग बाहर आ रहे हो क्या रीना कहीं से बाहर नहीं आ सकती!”
“दरवाजे के नीचे की जगह तो बहुत छोटी है।” रानी चींटी सोचते हुए बोली, “लेकिन रुको शायद इसमें हमारी कोई मदद कर सकता है।” ऐसा कहते हुए चींटी की आँखों में चमक आ गयी।
चींटी कमरे में वापस गयी और एक बड़े से डबल बेड के नीचे दीवार से सटे पाये की तरफ पंहुची। वहाँ एक चूहा दीवार में सबसे नीचे वाले हिस्से को अपने मुंह से खोद रहा था। और देखने पर लगता था कि चूहे ये काम लम्बे समय से कर रहे थे क्योंकि वहाँ चूहे के शरीर जितना गड्ढा पहले ही हो चुका था। रानी चींटी ने चूहे से पूछा,”क्या ये गड्ढा बाहर बालकनी तक जाता है?” चूहे ने चींटी को बताया कि वो सब इसी कोशिश में हैं। एक बार में एक चूहा यहाँ दीवार की मिट्टी को कुतरता है और बाकी सब मकान की दूसरी जगहों पर खाने की तलाश करते रहते हैं। रानी चींटी ने चूहे को रीना चिड़िया के फंसे होने की बात बताई तो चूहा दौड़कर मकान के अलग-अलग हिस्सों में बैठे अपने साथियों को बुला लाया। अब उन्होंने एक साथ ज्यादा ताकत से दीवार के उस गड्ढे को अपनी मुंह से कुतरना शुरु कर दिया। देखते ही देखते थोड़ी ही देर में दीवार के गड्ढे से बालकनी में लगे बल्ब की पीली रोशनी दिखाई देने लगी। रानी चींटी ने छिपकली को बोलकर रीना चिड़िया को बिस्तर के नीचे इस गड्ढे के पास बुला लिया।
बस कुछ ही देर में एक चूहा उस सुरंग से घुसकर बालकनी में चला गया। इसके बाद जब अपने पंखों को समेटी हुई रीना उस सुरंग से बाहर आई तो रानी चिड़ियाँ ने उसे गले लगा लिया। रिंकी-पिंकी-चिंकी-मिली और जूली ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और उसका हाल चाल पूछने लगी। बाकी चिड़ियाँ ने भी चैन की सांस ली।
रानी चिड़ियाँ ने चींटियों और चूहों का शुक्रिया अदा किया और चींटी से छिपकली का धन्यवाद कहने को कहा। उसने वादा किया कि वह उन सबसे मिलने यहीं बालकनी पर आती रहेगी और ज़रूरत पड़ने चिड़ियों का झुंड उनकी मदद करेगा।
इसके बाद चिड़ियों का झुंड गिनती पूरी होने पर खुशी-खुशी अपने पेड़ों पर चला गया।

