दुनिया-भर के गुण दिखते है औगुनिया में

  पिछले दिनों राजेश जोशी, कुमार अम्बुज और नीलेश रघुवंशी का एक पत्र छपा था भारत भवन भोपाल के सन्दर्भ…

इंटरनेट है तो फ्रेंडशिप है फ्रेंडशिप है तो शेयरिंग है

कल \’जनसत्ता\’ में सुधीश पचौरी का यह लेख आया था. जिन्होंने नहीं पढ़ा हो उनके लिए इसे साझा कर रहा…

जिंदगी तुम्हारी शुभाकांक्षाओं के उजास से

आज कलावंती की कविताएँ. कलावंती जी कविताएँ तो लिखती हैं लेकिन छपने-छपाने में खास यकीन नहीं करतीं. मन के उहापोहों,…

भारत रत्न का अगला कोई हकदार है तो वर्गीज कुरियन

श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन को लेकर श्रद्धांजलियों का दौर थम चुका है. उनके योगदान का मूल्यांकन करते हुए…

भैया एक्सप्रेस और चाचा की टिप्पणी

  ‘बया’ पत्रिका का नया अंक अरुण प्रकाश पर एकाग्र है. इसमें मैंने भी अरुण प्रकाश जी के ऊपर कुछ…

लेखन एक जागृत स्वप्न है

  राजेश जोशी के ये विचार प्रीति सिंह परिहार से बातचीत पर आधारित हैं. राजेश जोशी के लिए साहित्य हमेशा…

उनके पास ज्‍यादा काम नहीं है तभी तो लिखते हैं!

हमारे समाज, खासकर हिंदी समाज में लेखक नाम की संज्ञा अब भी कोई खास प्रभाव नहीं पैदा कर पाती, उसे…

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