संजीव पालीवाल से प्रभात रंजन की बातचीत

आज प्रस्तुत है ‘मुंबई नाइट्स’ के लेखक संजीव पालीवाल से बातचीत। संजीव जी से बातचीत करने में बहुत आनंद इसलिए…

भइया का ‘सादी’

साहित्य का जीवन में समावेश सांस्कृतिक मूल्य है। इसमें गीत-कविता बहुधा आते हैं। यह पुस्तक अंश नौ साल पुरानी घटना…

विद्यानिवास मिश्र के भारत पर हितेन्द्र पटेल

प्रसिद्ध विद्वान विद्यानिवास मिश्र ने 1998 में एक किताब लिखी थी- ‘सपने कहाँ गए’। यह किताब एक तरह से आज़ादी…

ट्विंकल तोमर सिंह की कहानी ‘दो दीवाने शहर में’

विवाह संस्था की नींव स्त्री-पुरुष पर टिकी रहती है, यह तो सामान्य सी बात है लेकिन प्रत्येक स्त्री-पुरुष की स्थिति…

संपादन के अनुभव संपादक की ज़ुबानी

जानकी पुल की युवा संपादक अनुरंजनी ने संपादन के अपने अनुभवों को साझा किया है। पढ़िएगा कितनी ईमानदारी से लिखा…

पंकज सुबीर की कहानी ‘वीरबहूटियाँ चली गयीं’

मेरे भीतर के पाठक को कथा से पहले वातावरण जानना होता है कि कथा के पात्र आखिर विचरते कहां हैं, क्योंकि…

अनुपमा शर्मा की कविताएँ

पेशे से कॉरपोरेट मजदूर, अनुपमा शर्मा एक अलग पहचान की तलाश में हैं। इस तलाश के सफर में अपने विचारों…

सोमेश मल्होत्रा की ‘गौरव’ गाथा

कल की बात है। जैसे ही मैँने महफिल मेँ कदम रखा, गौरव त्यागी मिल गए। गौरव त्यागी का बहुत गौरवशाली…

रंजिता सिंह ‘फ़लक’ की प्रेम कविताएँ

आज रंजिता सिंह ‘फ़लक’ की कुछ प्रेम कविताएँ प्रस्तुत हैं, जिनसे हमारा परिचय करा रहे युवा कवि आशुतोष प्रसिद्ध। यह…

इरशाद ख़ान सिकंदर की कहानी ‘अनासिर में ज़हूरे-तरतीब’

इरशाद ख़ान सिकन्दर शायर हैं, आजकल उनके नाटकों की धूम मची हुई है। वे बहुत अच्छे क़िस्सागो भी हैं। यक़ीन…

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