‘काजल लगाना भूलना’ का मर्म

  व्योमेश शुक्ल समकालीन हिंदी कविता का जाना पहचाना नाम है। हाल में उनका कविता संग्रह प्रकाशित हुआ है ‘काजल…

स्पीति में बारिश-कृष्णनाथ को पढ़ते हुए

  कृष्णनाथ के यात्रा वृत्तांतों का अलग महत्व रहा है। उनके यात्रा-वृत्त ‘स्पीति में बारिश’ को पढ़ते हुए यतीश कुमार…

प्रदीपिका सारस्वत की कहानी ‘मैं सुंदरता से प्रेम करती हूँ’

  प्रदीपिका सारस्वत बहुत अलग तरह का गद्य लिखती हैं। जीवन के अनुभव, सोच सब एकमेक करती हुई वह कुछ…

पंखुरी सिन्हा की कहानी ‘मृग मरीचिका और कस्तूरी कथा’

  पंखुरी सिन्हा की कहानियों ने इक्कीसवीं शताब्दी के पहले दशक में आलोचकों-पाठकों सभी को प्रभावित किया था। वह कविताएँ…

वर्तमान में लोकप्रिय साहित्य का कोई मुकाम नहीं हैं: सुरेन्द्र मोहन पाठक

  हिंदी के जाने माने लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक ने यह लेख लिखा है। 60 साल की लेखन यात्रा के…

‘न हन्यते’ और ‘बंगाल नाइट्स’: एक शरीर दो आत्मा

  मैत्रेयी देवी के उपन्यास ‘न हन्यते’ और मीरचा इल्याडे के उपन्यास ‘बंगाल नाइट्स’ के बारे में एक बार राजेंद्र…

आईनासाज़:परछाइयां और आहटें पकड़ने का अजब खेल

  अनामिका के उपन्यास ‘आईनासाज़’ की कथा को लेकर बहुत लिखा गया है लेकिन उसके विजन को लेकर बात कम…

बेवफ़ा नायिकाओं का वफ़ादार उपन्यासकार दत्त भारती

  फ़िल्म ‘प्यासा’ एक ऐसे शायर की कहानी है जो अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद में है। असल में, इस…

‘मुझे चाँद चाहिए’ पढ़ते हुए कुछ कविताएँ

  मुझे याद है बीसवीं शताब्दी के आख़िरी वर्षों में सुरेन्द्र वर्मा का उपन्यास ‘मुझे चाँद चाहिए’ प्रकाशित हुआ था।…

विवाह को ‘जीवन बीमा’ कहने वाली लेखिका प्रियंवदा देवी

    सुरेश कुमार हिंदी के नवजागरणकालीन साहित्य से जुड़े अछूते विषयों, भूले हुए लेखक-लेखिकाओं पर लिखते रहे हैं। आज…

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