शादियों के दिन महामारियों में बीत गए

  युवा लेखक रविंद्र आरोही ने महामारी के इस दौर में इस स्मृति कथा के बहाने हम तमाम लोगों की…

कलिकथा: मंज़िल वाया बाइपास: यतीश कुमार

यतीश कुमार ने काव्यात्मक समीक्षा की अपनी विशेष शैली विकसित की और इस शैली में वे अनेक पुस्तकों की समीक्षाएँ…

लाल्टू का ‘खंडहर एक सफ़र’

लाल्टू हिंदी के जाने माने कवि  हैं, सामाजिक कार्यकर्ता हैं, अनुवादक हैं। इस बार उन्होंने गद्य में खंडहर का सफ़रनामा…

अविमुक्त क्षेत्र (काशी) के  मुक्त मेघों की प्रतीक्षा – भाग -1

  प्रियंका नारायण बीएचयू की शोध छात्रा रही हैं। मिथकों पर अच्छा लिखती हैं। इस बार उन्होंने गल्प में मिथकीय…

‘काजल लगाना भूलना’ का मर्म

  व्योमेश शुक्ल समकालीन हिंदी कविता का जाना पहचाना नाम है। हाल में उनका कविता संग्रह प्रकाशित हुआ है ‘काजल…

स्पीति में बारिश-कृष्णनाथ को पढ़ते हुए

  कृष्णनाथ के यात्रा वृत्तांतों का अलग महत्व रहा है। उनके यात्रा-वृत्त ‘स्पीति में बारिश’ को पढ़ते हुए यतीश कुमार…

प्रदीपिका सारस्वत की कहानी ‘मैं सुंदरता से प्रेम करती हूँ’

  प्रदीपिका सारस्वत बहुत अलग तरह का गद्य लिखती हैं। जीवन के अनुभव, सोच सब एकमेक करती हुई वह कुछ…

पंखुरी सिन्हा की कहानी ‘मृग मरीचिका और कस्तूरी कथा’

  पंखुरी सिन्हा की कहानियों ने इक्कीसवीं शताब्दी के पहले दशक में आलोचकों-पाठकों सभी को प्रभावित किया था। वह कविताएँ…

वर्तमान में लोकप्रिय साहित्य का कोई मुकाम नहीं हैं: सुरेन्द्र मोहन पाठक

  हिंदी के जाने माने लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक ने यह लेख लिखा है। 60 साल की लेखन यात्रा के…

‘न हन्यते’ और ‘बंगाल नाइट्स’: एक शरीर दो आत्मा

  मैत्रेयी देवी के उपन्यास ‘न हन्यते’ और मीरचा इल्याडे के उपन्यास ‘बंगाल नाइट्स’ के बारे में एक बार राजेंद्र…

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