आईनासाज़:परछाइयां और आहटें पकड़ने का अजब खेल

  अनामिका के उपन्यास ‘आईनासाज़’ की कथा को लेकर बहुत लिखा गया है लेकिन उसके विजन को लेकर बात कम…

बेवफ़ा नायिकाओं का वफ़ादार उपन्यासकार दत्त भारती

  फ़िल्म ‘प्यासा’ एक ऐसे शायर की कहानी है जो अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद में है। असल में, इस…

‘मुझे चाँद चाहिए’ पढ़ते हुए कुछ कविताएँ

  मुझे याद है बीसवीं शताब्दी के आख़िरी वर्षों में सुरेन्द्र वर्मा का उपन्यास ‘मुझे चाँद चाहिए’ प्रकाशित हुआ था।…

विवाह को ‘जीवन बीमा’ कहने वाली लेखिका प्रियंवदा देवी

    सुरेश कुमार हिंदी के नवजागरणकालीन साहित्य से जुड़े अछूते विषयों, भूले हुए लेखक-लेखिकाओं पर लिखते रहे हैं। आज…

प्रमोद द्विवेदी की कहानी  ‘पिलखुआ की जहाँआरा’

‘जनसत्ता’ के फ़ीचर एडिटर रहे प्रमोद द्विवेदी ने अपने कथाकार रूप के प्रति उदासीनता बरती नहीं तो वे अपनी पीढ़ी…

उर्मिला शिरीष की कहानी ‘बिवाइयाँ’

  उर्मिला शिरीष 1980-90 के दशक की पढ़ी जाने वाली लेखिका रही हैं। मेरे मेल पर उनकी यह कहानी आई…

समयोत्तर स्मृतियों की यात्रा-डायरी: प्रदीपिका सारस्वत

युवा लेखिका प्रदीपिका सारस्वत की यह यात्रा डायरी प्रस्तुत है- ============== उस पगडंडीनुमा सड़क पर चलते-चलते मैं अचानक नदी की…

कलीमुद्दीन अहमदः अँगरेज़ी के प्रोफेसर, उर्दू के सबसे बड़े आलोचक

पटना कॉलेज, पटना में अंग्रेज़ी के प्रोफ़ेसर कलीमुद्दीन अहमद को उर्दू के बड़े आलोचकों में गिना जाता है। उनके जीवन,…

सवाल अब भी आँखे तरेरे खड़ा है- और कितने पाकिस्तान?

कमलेश्वर का उपन्यास ‘कितने पाकिस्तान’ सन 2000 में प्रकाशित हुआ था। इस उपन्यास के अभी तक 18 संस्करण प्रकाशित हो…

पंकज मित्र की कहानी ‘मंगरा मॉल’

  पंकज मित्र हिंदी के वरिष्ठ लेखक हैं और निस्संदेह अपनी तरह के अकेले कथाकार हैं। समाज की विद्रुपताओं पर…

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