वीरेन डंगवाल सच्चे अर्थों में जनकवि थे. उनकी मृत्यु के बाद उनकी सम्पूर्ण कविताओं का संकलन आया है ‘कविता…
Author: prabhat
कुछ-कुछ सीखना और बहुत कुछ न सीख पाना: व्योमेश शुक्ल
कवि व्योमेश शुक्ल ने अपनी रंग-यात्रा पर बहुत अच्छा लिखा है. इससे किसी भी कलाकार की यात्रा, उसकी जद्दोजहद,…
लेखकों को ‘चीयर अप’ करने के लिए पुस्तक विमोचन पार्टी में कोई हर्ज नहीं है!
पुस्तक विमोचन संस्कृति पर लेखक महेंद्र राजा जैन का यह लेख आज ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित हुआ है. न…
सियासत की धुन पर मोहब्बत का फ़साना ‘हसीनाबाद’
गीताश्री के पहले उपन्यास ‘हसीनाबाद’ ने इस साल पाठकों-समीक्षकों-आलोचकों का ध्यान अच्छी तरह खींचा. इस उपन्यास की यह समीक्षा…
अंग्रेजी कवि संजीब कुमार बैश्य की कविताएँ हिंदी अनुवाद में
संजीब कुमार बैश्य दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज(सांध्य) में अंग्रेजी के प्राध्यापक है. असम के रहने वाले…
प्रवीण कुमार और रेणु स्कूल की मिस हीराबाई
‘तीसरी कसम’, हिरामन, हीराबाई पर इतना लिखा जा चुका है कि लगता है अब नया क्या पढना? इसीलिए कोई…
सूरज बड़त्या की कहानी ‘कबीरन’
हाल के वर्षों में दलित साहित्य में सूरज बड़त्या ने अच्छी पहचान बनाई है. आज उनकी एक कहानी आपके लिए-…
सोचा ज़्यादा किया कम उर्फ एक गँजेड़ी का आत्मालाप
विमल चन्द्र पाण्डेय की की लम्बी कविता. लम्बी कविता का नैरेटिव साध पाना आसान नहीं होता. स्ट्रीम ऑफ़ कन्सशनेस की तीव्रता…
लोकप्रिय शैली में लिखी गंभीर कहानियां
आकांक्षा पारे बहुत जीवंत, दिलचस्प कहानियां लिखती हैं और वह बिना अधिक लोड लिए. इसीलिए कथाकारों की भीड़ में…
मनोहर श्याम जोशी की कविता ‘निर्मल के नाम’
निर्मल वर्मा के लिए उनके समकालीन लेखक मनोहर श्याम जोशी ने यह कविता 1950 के दशक के आखिरी वर्षों…



