किताबों की दुनिया – काग़ज़ से स्वाइप तक: प्रवीण कुमार झा

किताब और पढ़ने की संस्कृति पर जाने-माने लेखक प्रवीण कुमार झा का यह लेख बहुत विस्तार से और बहुत रोचक…

झूलन के मौसम में मुंगेर

झूलन का त्योहार भगवान् कृष्ण और देवी राधा को समर्पित है। झूलोँ, गीतोँ और नृत्य से सजा यह भारत की…

लोक गायन और पं. छन्नूलाल मिश्र

आज पढ़िए प्रसिद्ध गायक छन्नूलाल मिश्र की गायकी पर अम्बुज पाण्डेय का यह लेख- मॉडरेटर ================== पं. छन्नूलाल मिश्र को…

‘वर्दी वाला गुंडा’ पर सुरेंद्र मोहन पाठक की टिप्पणी

हिन्दी में लोकप्रिय उपन्यास धारा के दो शिखर लेखक रहे- सुरेंद्र मोहन पाठक और वेद प्रकाश शर्मा। 1990 के दशक…

औपनिवेशिक ज्ञानकांड का प्रतिरोध और रामविलास शर्मा का चिंतन

अभिषेक कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में ‘19वीं सदी का हिन्दी नवजागरण: औपनिवेशिक प्रभाव या आंतरिक गति का विकास’…

कोआन, जॉन रॉल्स और विदुषी विद्योत्तमा 

कम से कम एक दशक से युवा लेखक प्रचण्ड प्रवीर ‘कल की बात’ नामक एक सीरीज़ लिख रहे हैं। इस…

कृष्ण बलदेव वैद: अपनी भाषा का विस्थापित लेखक

आज रज़ा न्यास की तरफ़ से मूर्धन्य लेखक कृष्ण बलदेव वैद की स्मृति में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में कार्यक्रम का…

मुसलमानों में जातिगत ऊँच-नीच का साहित्यिक दस्तावेज़

सुहेल वहीद उर्दू-हिन्दी के जाने-माने पत्रकार-लेखक हैं। आज उनका यह लेख पढ़ते हैं जो यह बताता है कि मुसलमान समाज…

निर्मल वर्मा को फिर से बूझना: योगेन्द्र यादव

कल इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में प्रसिद्ध समाजवादी राजनीतिक चिंतक योगेन्द्र यादव का एक लेख प्रकाशित हुआ जो निर्मल वर्मा के…

रम्माण: राम कथा का गढ़वाली संस्करण

रम्माण उत्सव उत्तराखण्ड के गढ़वाल क्षेत्र के चमोली ज़िले के गाँवों में मनाया जाने वाला उत्सव है। रम्माण नाम रामायण…

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