जीते जी किंवदंती बन चुके नामवर सिंह की नई किताब आ रही है ‘द्वाभा’. राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस…
न माला न मंतर न पूजा न सजदा तुझे हर घड़ी सोचना भी इबादत
रचना भोला यामिनी के लव नोट्स की किताब ‘मन के मंजीरे’ इस साल के आरम्भ में राजपाल एंड संज से…
पेंगुइन से संपर्क हुआ तो मेरे पंख कुछ और खुल गए- नरेन्द्र कोहली
हिंदी के वरिष्ठ लेखक नरेन्द्र कोहली की दो किताबें जनवरी में पेंगुइन रैंडम हाउस-हिन्द पॉकेट बुक्स से प्रकाशित होने वाली…
प्रतिभा चौहान की कुछ कविताएँ
प्रतिभा चौहान बिहार न्यायिक सेवा में अधिकारी हैं लेकिन मूलतः कवयित्री हैं. उनकी कवितायेँ लगभग सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो…
सुरेंद्र मोहन पाठक की नजर से हिन्द पॉकेट बुक्स का इतिहास
हाल में हिंदी प्रकाशन जगत में एक बड़ी घटना बड़ी खामोशी से हुई. पेंगुइन रैंडम हाउस और हिन्द पॉकेट बुक्स…
कोई इच्छा अधूरी रह जाये, तो जिंदगी में आस्था बनी रहती है!
सुरेंद्र वर्मा का उपन्यास ‘मुझे चाँद चाहिए’ वह उपन्यास है जिसकी समीक्षा लिखते हुए उत्तर आधुनिक आलोचक सुधीश पचौरी ने…
सिनेमा में काशी भी है और अस्सी भी!
फिल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ की समीक्षा लिखी है रांची के नवीन शर्मा ने- मॉडरेटर ========================================== किसी भी साहित्यिक कृति चाहे वो…
तथ्य और सत्य के बीच फेक न्यूज
युवा पत्रकार अरविन्द दास का यह लेख फेक न्यूज को लेकर चल रही बहस को कई एंगल से देखता है.…
रेंगने वाली हिंदी अब उड़ रही है!
हिंदी की स्थिति पर मेरा यह लेख ‘नवभारत टाइम्स’ मुम्बई के दीवाली अंक में प्रकाशित हुआ है- प्रभात रंजन ===========================…
यह सामा-चकेवा का मौसम है
कार्तिक मास के बढ़ते चाँद के साथ मिथिला-तिरहुत के लोगों की स्मृतियों में सामा चकेवा आ जाता है. भाई-बहन के…



