राजनंदिनी रावत की छोटी-छोटी कविताएँ

राजनंदिनी रावत राजस्थान के ब्यावर में रहती हैं। खूब पढ़ती हैं और थोड़ा बहुत लिखती हैं। आज पढ़िए उनकी कविताएँ। कुछ कविताएँ एक-एक पंक्ति की हैं- मॉडरेटर
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इंसानों को पुकारते समय
मैंने जाना
इंसानों को पीठ के बल नहीं
सामने से पुकारना चाहिए।
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वह क्षण मृत्यु समान था
जब मैं प्रेम चाहती थी और उसने मुझे पीड़ा दी।
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दुनिया में हर वस्तु खरीदने के लिए नहीं थी
ना ही स्वामित्व के लिए
वह भोग,भाव,प्रयोग एवं त्याग के लिए थी।
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इंसानों में सब कुछ सामान होकर भी कुछ भी समान नहीं होता
क्या यही एक कहानी का आधार हो सकता है।
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मैं कहानी में तब्दील होती जा रही थी मेरा हृदय दृश्य का साक्षी बन गया था वह कब्र में बदलता जा रहा था
मैं मर रही थी
‘जीवन कैसा होना चाहिए ‘ का रहस्य लेकर अपने साथ।
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क्या यह सच है कि इंसान एक दिन मिट्टी बन जाता है!
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मैं स्वयं में बहुत कुछ समेट सकती हूँ लेकिन स्वयं को नहीं समेट सकती।
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क्या हृदय मात्र एक अंग है
बुद्धि वालों के लिए।
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मेरे प्रिय! क्यों तुम्हें नहीं कह सकी
मेरे प्रिय हो तुम।
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मैं आग के बारे में सोचती थी
राख के बारे में सोचती थी
पानी के बारे में सोचती थी
मैं सोचती थी
दुनिया क्यों है
मैं क्यों हूं
अगर हूं तो एक दिन क्यों खत्म हो जाऊंगी
क्या सिर्फ इसलिए कि मैं शुरू हुई थी।
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यह प्रेम की परकाष्ठा है
आँखें बंजर होती है
हृदय रोता है और जिह्वा निःशब्द ।
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प्रेम यातना का सफर तय कर ले मगर याचना का कभी ना करें।
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सबका सुंदर एक है सबका कुरूप अलग।
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क्या ये दुनिया एक दिन खत्म हो जाएगी और कोई लेखक इस दुनिया की अंतिम कहानी लिखेगा!
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मानव जीवन का अंतिम प्रयास क्या होगा!
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क्या इंसान मिट्टी होकर ब्रह्मांड में बिखर जाता है।
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क्या एक दिन में ब्रह्मांड में बिखर जाऊंगी।
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मुझे खोने से पहले आवाज दो।
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साधारण से साधारण मनुष्य भी ईश्वर का साक्षात्कार लेता है।
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इस दुनिया में कटघरे में ईश्वर है।
हो सकता है किसी दुनिया में इंसान कठघरे में हो।
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मैं केवल अंगों से नहीं बनी हूँ।
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मैं हृदय की खोज में निकली थी लेकिन मुझे दिमाग के ढेर मिले।
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क्या किसी दुनिया के गणित में ईश्वर=इंसान होगा।
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यह कब समझ आता है कि किसे आवाज देनी चाहिए और किसे जाने देना चाहिए।
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जो छल में पारंगत हो,प्रेम का महत्व नहीं जानते।
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प्रेम में पीड़ा हो,पीड़ा से प्रेम न हो।
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सबसे अच्छी कहानियाँ ईश्वर लिखता है।
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इंसानी भावनाओं को नकार कर कोई कहानी नहीं लिखी जा सकती।
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समय से अधिक स्वतंत्र इस दुनिया में क्या है।
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मैं दुनिया के ब्लैक बोर्ड से अपना नाम मिटाना चाहती हूँ।
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मेरा अंत , एक दुनिया का अंत हो सकता है।
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अनन्तः हमें ज्ञात होता है
दृश्य और अदृश्य दोनों मौजूद हैं।
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हर तरह की किताब लिखी जानी चाहिए
सवाल पर खत्म होने वाली
जवाब पर खत्म होने वाली।
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लेखक कागज पर मरता है।
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मैं हाथ पकड़ता हूँ
वह छुड़ाती है
मैं जितनी सख्ती से पकड़ता हूँ
वह उतनी मासूमियत से छिड़काती है मैं देखता हूँ
उसके उड़ते बाल
उसका इठलाता चेहरा
मैं चाहता हूँ
वह मेरा हाथ पकड़ना प्रेम समझे वह अपना हाथ छुड़ा लेना प्रेम समझती है मैं उसे छोड़ता हूँ
वह उड़ जाती है
वह मेरी चिड़िया है
मेरे पास ही आएगी
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वह उसकी मन की तहों को खोजता है
उससे संवाद करता है
उसके साथ खिलखिलाता है
उसका फोरप्ले उसके बालों को सुलझाना है
उसे पायल पहनना है
वह उसे इठलाते हुए देखता है
वह हमेशा उसके पास था
हाँ! वह उसका कल्पना पुरुष था।
प्रेम में स्त्री का कल्पना पुरुष
हमेशा देह से आगे रहता है
स्त्री का प्रेम
किसी भी युग में
हमेशा देह से आगे रहेगा ।

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