हाइफ़न: भारतीय भाषाओं के साहित्य के आपसी संवाद का मंच

इतवार के इंडियन एक्सप्रेस में पारोमिता चक्रवर्ती के साथ कन्नड़ के लेखक विवेक शानभाग की बातचीत पढ़ी। विवेक समकालीन भारतीय…

क्या प्रकृति को भी पितृसत्ता से आज़ादी चाहिए?

यह लेख प्रकृति और मनुष्य के रिश्ते को स्त्रीवाद के नज़रिए से देखती है। इको फेमिनिज्म पर कुमारी रोहिणी का…

मैं वापस आऊंगा: सरहद के उस पार, याद के इस पार

आज इम्तियाज़ अली की फ़िल्म ‘मैं वापस आऊँगा’ रिलीज़ हुई है। विभाजन की त्रासदी और इटरनल प्रेम की थीम को…

माइकल: एक मिथक, एक बच्चा और एक अधूरी कहानी

हाल में ही प्रसिद्ध गायक-परफ़ॉर्मर माइकल जैक्सन की बायोपिक आई है- माइकल। इस बायोपिक पर यह विस्तृत टिप्पणी पढ़िए। माइकल…

इतिहास, स्मृति और लेखकीय संवेदना का संतुलन: ‘इतिहास की थाली’

हाल में ही पेंगुइन स्वदेश से प्रकाशित पुस्तक ‘इतिहास की थाली’ प्रकाशित हुई है। लेखक अनिमेष मुखर्जी की यह किताब…

आप हीलिंग फ़िक्शन के बारे में क्या जानते हैं?

आजकल ‘बिबलियो फ़ार्मेसी’ और ‘पोएट्री फ़ार्मेसी’ की चर्चा है। एक जापानी उपन्यास ‘मोरीसाकी बुकशॉप के ख़ुशनुमा दिन‘ के बारे में…

कोरियाई ड्रामा और सिनेमा: चमक के पीछे का अंधेरा

कोरियन भाषा संस्कृति की विशेषज्ञ कुमारी रोहिणी ने कुछ समय पहले ‘द वायर’ पर कोरियन संस्कृति के उभार के ऊपर…

कोरियाई उपन्यास ‘इन ऑर्डर टू लिव’ पर एक टिप्पणी

कोरियाई भाषा के चर्चित उपन्यास ‘In Order to Live: A North Korean Girl’s Journey to Freedom‘ पर यह टिप्पणी लिखी…

‘बीसवीं शताब्दी के तानाशाह’ के बहाने कुछ बातें

हाल में राजकमल प्रकाशन से अशोक कुमार पांडेय की किताब आई है ‘बीसवीं शताब्दी के तानाशाह’। इस किताब को पढ़कर…

अमिताव घोष को 2025 का पार्क क्योंग-नी पुरस्कार

भारतीय मूल के प्रसिद्ध लेखक अमिताव घोष को दक्षिण कोरिया का प्रसिद्ध साहित्यिक पुरस्कार पार्क क्योंग-नी पुरस्कार देने की घोषणा…

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