भारतीय संगीत परंपरा पर यतीन्द्र मिश्र की किताब आई है ‘नैनन में आन-बान’, जिसके ऊपर मेरी यह टिप्पणी पढ़िए- प्रभात…
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‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ की एक आरंभिक समीक्षा
विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ की यह समीक्षा उपन्यास की आरंभिक समीक्षाओं में है…
कृष्ण बलदेव वैद: अपनी भाषा का विस्थापित लेखक
आज रज़ा न्यास की तरफ़ से मूर्धन्य लेखक कृष्ण बलदेव वैद की स्मृति में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में कार्यक्रम का…
अम्बर पाण्डेय से प्रभात रंजन की बातचीत
समकालीन लेखकों में अम्बर पाण्डेय ऐसे हैं जिनके पास कहने के लिए बहुत कुछ है। परंपरा की गहरी समझ है…
मराठी के शीर्ष लेखक विश्वास पाटिल से प्रभात रंजन की बातचीत
आज प्रस्तुत है मराठी भाषा के शीर्ष लेखक बल्कि कहना चाहिए कि भारत के शीर्ष लेखक विश्वास पाटिल से बातचीत।…
शिवमूर्ति: हमें नयी पीढ़ी के लेखन पर विश्वास रखना होगा.
2012 में जब शिवमूर्ति जी 60 साल के हुए थे तो उनसे मैंने यह बातचीत की थी। आज उनकी…
अपनी हिंदी में बेस्टसेलर की तलाश
हिंदी में ‘बेस्टसेलर’ की चर्चा एक बार फिर शुरु हो गई है. एक ज़माना था जब पत्रिकाओं में निराला की…
मनोहर श्याम जोशी की परम्परा और उनका विद्रोह
मनोहर श्याम जोशी के जन्मदिन पर प्रस्तुत है यह साक्षात्कार जो सन २००४ में आकाशवाणी के अभिलेखगार के लिए की गई उनकी…
एक पुरानी कहानी ‘फ़्रांसिसी रेड वाइन’
मेरी एक पुरानी कहानी- प्रभात रंजन ========================= चंद्रचूड़जी की दशा मिथिला के उस गरीब ब्राह्मण की तरह हो गई…
हेमिंग्वे की स्मृति को समर्पित कहानी- हिडेन फैक्ट
मेरे पहले कहानी संग्रह ‘जानकी पुल’ में एक कहानी है ‘हिडेन फैक्ट’, जो महान लेखक हेमिंग्वे की स्मृति को समर्पित…



