सत्तावन साल पुराना शायर

हमारे शायर लेखक और महकमा-ए-पुलिस के अधिकारी सुहैब अहमद फ़ारूक़ी सत्तावन साल के हो गये हैं। इस बात का क़बूलनामा…

मुहर्रम: स्मृति, प्रतिरोध और सत्य की अमर परंपरा

मुहर्रम को प्रायः एक धार्मिक आयोजन या शोक-परंपरा के रूप में देखा जाता है, लेकिन उसके भीतर स्मृति, प्रतिरोध और…

पाठक की कहानी एक पाठक की ज़ुबानी

लोकप्रिय साहित्य पर हिंदी में अपेक्षाकृत कम गंभीर लेखन हुआ है, जबकि उसके पाठकों की दुनिया बेहद व्यापक, जीवंत और…

बशीर बद्र: मेरी यादों, मेरी ज़बान और मेरी साँसों में!

आज बशीर बद्र जो, उनकी शायरी को याद कर रहे हैं सुहैब अहमद फ़ारूक़ी। पेशे से पुलिस अफ़सर हैं, मिज़ाज…

मसला वर्गीकरण का नहीं, मेहनताने का था

कल जानकी पुल पर प्रसिद्ध लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक ने लिट फ़ेस्ट, मानदेय को लेकर अपने विचार रखे। आज उसकी…

फ़ालतू तो दूर मुझ में तो बेफ़ालतू भी अक़्ल नहीं!

पुलिस अफ़सर शायर सुहैब अहमद फ़ारूक़ी ने लल्लनटॉप पर ईश्वर को लेकर चली बहस की पृष्ठभूमि में यह टीप लिखी…

धर्मेंद्र पा’जी आप तो मोहब्बत का सबसे खूबसूरत नाम थे

1970-80 के दशक में जो लोग बड़े हो रहे थे धर्मेंद्र उनकी यादों में तरह-तरह से बसे हैं। इसी तरह…

निदा फ़ाज़ली: पहचानते तो होंगे निदा फ़ाज़ली को तुम

कल प्रसिद्ध शायर निदा फ़ाज़ली की जयंती थी। इस मौक़े पर उनको याद करते हुए यह टिप्पणी लिखी है सुहैब…

अब तक छप्पन की कहानी शायर की ज़ुबानी

उर्दू शायरी और पुलिस की अफ़सरी दोनों को बखूबी साधने वाले सुहैब अहमद फ़ारूक़ी कल छप्पन साल के हुए तो…

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