कोमलता के साथ थोड़े खुरदुरेपन को साधती कहानियाँ

हाल में युवा लेखिका दिव्या विजय का कहानी संग्रह आया है ‘तुम बारहबानी’। इस संग्रह की बहुत सारगर्भित भूमिका लिखी…

यतीन्द्र मिश्र से प्रभात रंजन की बातचीत

यतीन्द्र मिश्र को हाल के वर्षों में हम ‘लता सुरगाथा’, ‘गुलज़ार साब’ जैसी किताबों से जानने लगे हैं। लेकिन वे…

‘बिना कलिंग विजय के’ की एक कविता के बहाने

कल साहित्य आजतक में यतीन्द्र मिश्र के कविता संग्रह ‘बिना कलिंग विजय के’ का लोकार्पण हुआ। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित…

यतीन्द्र मिश्र की ग्यारह नई कविताएँ

बतौर पाठक यतीन्द्र मिश्र से मेरा पहला परिचय उनकी कविताओं के माध्यम से ही हुआ था। साल था 1999. इससे…

गुलज़ार को संपूर्णता में सामने लाने वाली किताब

यतीन्द्र मिश्र की किताब ‘गुलज़ार सा’ब: हज़ार राहें मुड़ के देखीं’ पर यह टिप्पणी लिखी है कवि-लेखक यतीश कुमार ने।…

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