Author: prabhat
कुछ कविताएँ कुमार अनुपम की
कुमार अनुपम की कविताएँ समकालीन कविता में अपना एक अलग स्पेस रचती है- \’अपने समय की शर्ट में एक्स्ट्रा बटन की…
कुछ कविताएँ कुमार अनुपम की
कुमार अनुपम की कविताएँ समकालीन कविता में अपना एक अलग स्पेस रचती है- \’अपने समय की शर्ट में एक्स्ट्रा बटन की…
मैत्रेयी खुद रही हैं स्त्री-देह विमर्श की पैरोकार- चित्रा मुद्गल
पिछले कुछ महीनों में ‘बिंदिया’ पत्रिका ने अपनी साहित्यिक प्रस्तुतियों से ध्यान खींचा है. जैसे कि नवम्बर अंक में प्रकाशित…
दूरदर्शन की नई पहल है ‘दृश्यांतर’
दूरदर्शन की नई पहल है ‘दृश्यांतर’. \’मीडिया, साहित्य,संस्कृति और विचार\’ पर एकाग्र इस पत्रिका का प्रवेशांक आया है. जिसमें सबसे…
दूरदर्शन की नई पहल है ‘दृश्यांतर’
दूरदर्शन की नई पहल है ‘दृश्यांतर’. \’मीडिया, साहित्य,संस्कृति और विचार\’ पर एकाग्र इस पत्रिका का प्रवेशांक आया है. जिसमें सबसे…
पुरुष थमाते है स्त्री के दोनों हाथों में अठारह तरह के दुःख
दुर्गा के बहाने कुछ कविताएँ लिखी हैं युवा कवयित्री विपिन चौधरी ने. एक अलग भावबोध, समकालीन दृष्टि के साथ. कुछ…
पुरुष थमाते है स्त्री के दोनों हाथों में अठारह तरह के दुःख
दुर्गा के बहाने कुछ कविताएँ लिखी हैं युवा कवयित्री विपिन चौधरी ने. एक अलग भावबोध, समकालीन दृष्टि के साथ. कुछ…
एक-आध दिन मौसी के घर भी चले जाना चाहिए
संजय गौतम कम लिखते हैं लेकिन मानीखेज लिखते हैं. उदाहरण के लिए यही लेख जिसमें इब्ने इंशा की किताब \’उर्दू…



