मुक्तिबोध अचानक क्यों लोकप्रिय हो उठे?

कुछ साल पहले मुक्तिबोध की प्रासंगिकता को लेकर प्रसिद्ध विद्वान अपूर्वानंद का यह लेख जनसत्ता में प्रकाशित हुआ था। मुक्तिबोध…

गुलजार की पहुँच हर पीढ़ी, हर दिल तक है!

गुलजार शायद ऐसे अकेले लेखक-कलाकार हैं जिनसे हर उम्र, हर सोच के लोग गहरे मुतास्सिर हैं. जीते जी वे एक…

भारतेंदु हरिश्चंद्र पर गोपाल राम गहमरी

भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटकों और उनके मंचन के प्रभाव को लेकर 19वीं शताब्दी के प्रसिद्ध लेखक गोपाल राम गहमरी ने…

रुज़ेविच की कविताओं का मूल पोलिश भाषा से अनुवाद

तादेऊष रुज़ेविच के निधन पर याद याद आया कि उनकी कविताओं का मूल पोलिश से अनुवाद अशोक वाजपेयी जी ने…

किस्सा पन्ना बाई और जगत ‘भ्रमर’ का!

‘पाखी’ में मेरी एक कहानी आई है। मुजफ्फरपुर के चतुर्भुज स्थान की गुमनाम गायिका पन्ना बाई से जुड़े किस्सों को…

भेड़चाल और हुआं-हुआं

आज कुछ कवितायें अनुराग अन्वेषी की। अखबार में शब्दों का सम्पादन करने वाले अनुराग अपनी कविताओं में भावनाओं का सम्पादन…

कुछ कविताएं केदारनाथ सिंह के नए संग्रह से

हमारी भाषा के महान कवियों में एक केदारनाथ सिंह ने इस साल 80 वें साल में प्रवेश किया है, और…

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Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी