कुंवर नारायण के किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है. ८० पार की उम्र हो गई है लेकिन साहित्य-साधना उनके लिए…
Author: prabhat
सच को झूठ और झूठ को सच बनाकर पेश करना है आसान
युवा पत्रकार विनीत उत्पल एक संवेदनशील कवि भी हैं. यकीं न हो तो उनकी कविताएँ पढ़ लीजिए- जानकी पुल. कुत्ते…
ऐसा नगर कि जिसमें कोई रास्ता न जाए
खलीलुर्रहमान आज़मी मशहूर शायर शहरयार के उस्तादों में थे. इस जदीदियत के इस शायर के बारे में शहरयार ने लिखा…
हमें फिर खुदा ने दिखाई बसंत
नजीर अकबराबादी की नज्मों के साथ सबको वसंतपंचमी मुबारक- जानकी पुल. १. फिर आलम में तशरीफ़ लाई बसंत हर एक…
गाँधी तूफान के पिता और बाजों के भी बाज़ थे
महात्मा गाँधी के ऊपर शायद हिंदी में सबसे अधिक कविताएँ लिखी गई हैं. महात्मा गाँधी के जन्मदिन के मौके पर प्रस्तुत…
भ्रष्टाचार अपने आप में एक सिस्टम और विचारधारा है
उदयप्रकाश हिंदी के उन थोड़े से ‘पब्लिक इंटेलेक्चुअल्स’ में हैं समय के साथ समाज में जिनकी विश्वसनीयता बढती गई है-…
कोई रूसो कोई हिटलर कोई खय्याम होता है
अदम गोंडवी की ग़ज़लों ने एक ज़माने में काफी शोहरत पाई थी. उस दौर की फिर याद इसलिए आ गई…
जयप्रकाश नारायण की एक दुर्लभ कहानी \’दूज का चाँद\’
कुछ महीने पहले हमने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की कहानी ‘टामी पीर’ को आप तक पहुँचाई थी. बाद में प्रो. मंगलमूर्ति…
बग़ैर शब्दों के बोलना है एक भाषा में
पीयूष दईया की कविताओं को किसी परंपरा में नहीं रखा जा सकता. लेकिन उनमें परंपरा का गहरा बोध है. उनकी…



