आज अमर कलाकार कुंदन लाल सहगल की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर पढ़िए लेखक, संगीतविद प्रकाशचंद्र गिरि का यह सुदीर्घ…
Category: लेख
अशोक वाजपेयी की कविताओं में माँ : एक गहरी मानवीय दृष्टि
आज कवि-विचारक अशोक वाजपेयी का जन्मदिन है। इस अवसर पर प्रस्तुत है कवयित्री स्मिता सिन्हा का यह लेख जो अशोक…
संपादक के रचना-केंद्रित अनुभव
जानकी पुल की युवा संपादक अनुरंजनी ने संपादन से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया है। आप भी पढ़ सकते…
श्याम बेनेगल की फ़िल्म “मंथन” एक प्रयोग
कल प्रसिद्ध फ़िल्मकार श्याम बेनेगल का निधन हो गया। वे समांतर सिनेमा के पर्याय थे। उनकी फ़िल्म मंथन के बहाने…
गगन गिल की कविताएँ : स्त्री के भीतर स्त्री की तलाश
अम्बुज पाण्डेय अपनी आलोचना और टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। गगन गिल की कविताओं पर उनका आलेख पाठकों के…
आलोक रंजन की कहानी ‘स्वाँग से बाहर’ पर कुमारी रोहिणी की टिप्पणी
जानकी पुल पर कल युवा लेखक आलोक रंजन की कहानी ‘स्वाँग से बाहर’ प्रकाशित हुई थी। कहानी समकालीन जीवन के…
‘बिना कलिंग विजय के’ की एक कविता के बहाने
कल साहित्य आजतक में यतीन्द्र मिश्र के कविता संग्रह ‘बिना कलिंग विजय के’ का लोकार्पण हुआ। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित…
साहित्यिक साक्षात्कार को ले कर कुछ विचार
जानकी पुल के सलाहकार संपादक प्रचण्ड प्रवीर ने साहित्यिक साक्षात्कार को लेकर अपने विचार रखे हैं और कुछ सुझाव भी।…
उत्सव’ तभी मनाये जाते हैं, जब अंधकार गहरा होता है!
दिवाली महा-उत्सव है। भारत की उत्सवधर्मिता पर महान लेखक उदय प्रकाश ने यह लेख लिखा है। कल उनका यह प्रकाशित…
विद्यानिवास मिश्र के भारत पर हितेन्द्र पटेल
प्रसिद्ध विद्वान विद्यानिवास मिश्र ने 1998 में एक किताब लिखी थी- ‘सपने कहाँ गए’। यह किताब एक तरह से आज़ादी…



