जर्मनी के क्राइम फ़िक्शन की किताब आई है ‘लुगदी रसोई’। मूल जर्मन भाषा से अनूदित और वाणी प्रकाशन से प्रकाशित…
Category: समीक्षा
ज़ालिम को जो न रोके वो शामिल है ज़ुल्म में
‘एक और द्रोणाचार्य’ (1977) शंकर शेष के इस नाटक की अंजलि नैलवाल ने बेहतरीन समीक्षा लिखी है। वे कुमाऊँ विश्वविद्यालय,…
जूठी गली- जहाँ न रातें बीत रही थीं न सुबह हो रही थी
वरिष्ठ लेखक हृषीकेश सुलभ का नया उपन्यास ‘जूठी गली’ जब से प्रकाशित हुआ है इसकी लगातार चर्चा हो रही है।…
स्मृतियाँ जहाँ समकालीन हैं
श्रीधर करुणानिधि का हाल ही में तीसरा काव्य-संग्रह प्रकाशित हुआ है ‘दिन की परछाँई धुंधली है’। जानकीपुल पर इससे पहले…
मिट्टी की महक और बारूद की गंध का संगम
हिंदी भाषा और नागरी लिपि के सतत उत्थान और प्रचार-प्रसार पर एकाग्र भारत की सबसे पुरानी संस्थाओं में से एक…
धुंधले साये में भी उजाले की उम्मीद
हाल में ही युवा कवि-लेखक श्रीधर करुणानिधि का कविता संग्रह प्रकाशित हुआ है ‘दिन की परछाँई धुंधली है’। सेतु प्रकाशन…
जेरी पिंटो का उपन्यास और मानसिक स्वास्थ्य
अंग्रेज़ी के प्रसिद्ध लेखक जेरी पिंटो बहुत अलग अलग तरह के विषयों पर लिखने के लिये जाने जाते रहे हैं।…
प्रेम में खामोशी ही अभिव्यक्ति
रंजिता सिंह फ़लक के काव्य संग्रह ‘चुप्पी प्रेम की भाषा है’ की कुछ कविताएँ हमने थोड़े समय पहले इस मंच…
बोरसी भर आँच: एक महसूस करने वाली अनुभूति
यतीश कुमार की किताब ‘बोरसी भर आँच’ को आये दो साल हो गये लेकिन आज भी लोग उसको पढ़ रहे,…
पीड़ाओं का आख्यान है ‘बवालिस्तान’
युवा लेखिका तस्नीम खान का कहानी संग्रह आया है ‘बवालिस्तान’। अनबाउंड स्क्रिप्ट प्रकाशन से प्रकाशित इस संग्रह को हाल में…



