मनीषा कुलश्रेष्ठ के उपन्यास ‘त्रिमाया’ पर यह टिप्पणी लिखी है युवा लेखक अविनाश कुमार ने। अविनाश कुमार उड़ीसा कैडर के…
Category: समीक्षा
उपनिषदों का आरण्य- वागीश शुक्ल
ऋतम्भरा : उपनिषद् आख्यायिका मञ्जरी उपनिषदों पर आधारित नौ कहानियाँ का सङ्कलन है। यह प्रचण्ड प्रवीर का बहुप्रतीक्षित कहानी सङ्ग्रह है,…
अंचित को पढ़ते हुए : मोह, विरक्ति और बेबसी
इस साल पटना पुस्तक मेले में युवा कवि अंचित के कविता संग्रह ‘आधी पंक्ति’ का लोकार्पण हुआ। निस्संदेह अंचित की…
आईनासाज़: संवादधर्मिता और सूफ़ीवाद का आख्यान
प्रसिद्ध लेखिका अनामिका के उपन्यास ‘आईनासाज़’ पर यह टिप्पणी लिखी है युवा लेखक महेश कुमार ने। अनामिका के उपन्यासों में…
‘निमित्त नहीं’ पर वागीश शुक्ल
प्रसिद्ध कवयित्री सुमन केशरी ने महाभारत की स्त्रियों को लेकर कविताएँ लिखीं, जो ‘निमित्त नहीं’ नाम से संग्रह के रूप…
कोरियाई उपन्यास ‘इन ऑर्डर टू लिव’ पर एक टिप्पणी
कोरियाई भाषा के चर्चित उपन्यास ‘In Order to Live: A North Korean Girl’s Journey to Freedom‘ पर यह टिप्पणी लिखी…
‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ की एक आरंभिक समीक्षा
विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ की यह समीक्षा उपन्यास की आरंभिक समीक्षाओं में है…
शैलेंद्र: एक किताब के बहाने याद
पिछले साल आवाज़ की दुनिया के जाने-माने नाम यूनुस ख़ान की किताब आई थी ‘उम्मीदों के गीतकार शैलेंद्र’। राजकमल से…
‘बीसवीं शताब्दी के तानाशाह’ के बहाने कुछ बातें
हाल में राजकमल प्रकाशन से अशोक कुमार पांडेय की किताब आई है ‘बीसवीं शताब्दी के तानाशाह’। इस किताब को पढ़कर…
आलोचना की धमक – मन मति रंक
ललित निबन्ध की विधा इन दिनों सोशल मीडिया की टिप्पणियों और समाचार-पत्रों के प्रकाशित आलेखों में क्षणिक रूप से उपस्थित…



