जगत सेठ: मिथक और यथार्थ

जगत सेठ को इतिहास की किताबों में ग़द्दार की तरह देखा गया, जिसके कारण देश में अंग्रेजों का शासन आया।…

स्मिता सिन्हा की कविताओं की वेदना और संवेदना

आज पढ़िए समकालीन हिन्दी कविताओं की प्रमुख हस्ताक्षरों में स्मिता सिन्हा के कविता संग्रह ‘रुंधे कंठ की अभ्यर्थना’ की समीक्षा।…

‘बिदाय दे मा’ पर भाषाविद सुरेश पंत की टिप्पणी

पिछले साल सुधीर विद्यार्थी की एक किताब आई ‘बिदाय दे मा’। किताब में क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाकउल्ला ख़ाँ, शचींद्रनाथ…

गीतांजलि श्री के उपन्यास ‘सह-सा’ पर महेश कुमार

हिन्दी की महत्वपूर्ण लेखिका गीतांजलि श्री का नया उपन्यास आया है ‘सह-सा’। ध्यान रहे कि 2022 में इंटरनेशनल बुकर प्राइज़…

वेद प्रकाश काम्बोज के उपन्यास ‘फिरंगिया’ पर यतीश कुमार

हिन्दी के प्रसिद्ध लोकप्रिय लेखक वेद प्रकाश काम्बोज का एक उपन्यास है ‘फिरंगिया’, जिसमें 17 वीं-18वीं शताब्दी के ठगों की…

‘भक्ति का लोकवृत्त और रविदास की कविताई’ पुस्तक की समीक्षा

कवि-आलोचक श्रीप्रकाश शुक्ल की किताब आई है ‘भक्ति का लोकवृत्त और रविदास की कविताई’। सेतु प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब…

हव्वा की बेटियों की दास्तान- दर्दजा

              दर्दजा(2023ई.)  एक ऐसा उपन्यास है जो स्त्रियों की सुन्नत जैसी विभत्स रूप को,…

शहादत के संग्रह ‘कर्फ़्यू की रात’ पर पवन करण

आज पढ़िए युवा लेखक शहादत के कहानी संग्रह ‘कर्फ़्यू की रात’ पर यह टिप्पणी। लोकभारती से प्राकाशित इस संग्रह पर…

‘अगम बहै दरियाव’ से गुजरते हुए:प्रेमकुमार मणि

वरिष्ठ लेखक शिवमूर्ति के उपन्यास ‘अगम बहै दरियाव’ पर यह टिप्पणी लिखी है वरिष्ठ लेखक प्रेम कुमार मणि ने। आप…

‘उम्मीद की तरह लौटना तुम’ – कविता में उम्मीद और संभावना

आज पढ़िए जाने-माने लेखक पंकज सुबीर के कविता संग्रह ‘उम्मीद की तरह लौटना तुम’ पर यह टिप्पणी। शिवना प्रकाशन से…

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