बात इतनी सपाट हो जाएगी कि कला नहीं रहेगी

आर. चेतनक्रान्ति की कविताएँ किसी आशा, किसी विश्वास की कविताएँ नहीं हैं, न ही स्वीकार की.  वे नकार के कवि…

‘समन्वय: आईएचसी भारतीय भाषा महोत्सव’

यह सहित्योत्सवों का दौर है. ऐसे में दिल्ली में १६-१८ दिसंबर को इण्डिया हैबिटैट सेंटर, दिल्ली प्रेस और प्रतिलिपि बुक्स…

मैं स्वीकार करती हूँ शोक और उत्सव

आज प्रस्तुत हैं लैटिन अमेरिकन देश पेरू की कवयित्री ब्लांका वरेला की कविताएँ. लगभग सुर्रियल सी उसकी कविताओं के अक्तावियो…

तो क्या पहले की तरह मिलोगे

इस बार ३ दिसंबर को ‘कवि के साथ’ कार्यक्रम में लीना मल्होत्रा भी अपनी कविताएँ सुनाएंगी. लीना जी की कविताओं…

ईसा तुम्हारी संतानें वैसी ही हैं अभी भी

आज तुषार धवल की कविताएँ. तुषार की कविताओं में न विचारधारा का दबाव है, न ही विचार का आतंक. उनमें…

अपर्णा मनोज की ‘द अनटाईटल्ड स्टोरी’

जैसे अपर्णा मनोज की कविताओं का अपना ही मुहावरा है, उसी तरह उनकी इस कहानी का स्वर. साधा हुआ शिल्प,…

जो ‘कूल’ होते हैं वे हिंदी के नॉवेल नहीं पढ़ते

चेतन भगत इस समय भारत में अंग्रेजी के निस्संदेह सबसे ‘लोकप्रिय’ लेखक हैं. सबसे बिकाऊ भी. जो बोल देते हैं…

नीला घर का महाकवि टोमस ट्रांस्टोमर

जून २००१ में हिंदी कवयित्री तेजी ग्रोवर स्वीडन गई थी तो वहाँ टोमस ट्रांसटोमर से मिलने गई थीं, उनके ऐतिहासिक…

प्रेम का आसरा अटारी पर बैठे कबूतर थे

अभी हाल में ही युवा कवयित्री विपिन चौधरी को डॉ अंजना सहजवाला कविता सम्मान मिला है. जानकी पुल की ओर…

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