हर पिछला कदम अगले कदम से खौफ खाता है

‘लप्रेक’ को लेकर हिंदी में जिस तरह की प्रतिक्रियाएं देखने में आ रही हैं उससे मुझे सीतामढ़ी के सबसे बड़े…

क्रांति और भ्रांति के बीच ‘लप्रेक’

लप्रेक के आने की सुगबुगाहट जब से शुरू हुई है हिंदी में परंपरा-परम्परा की फुसफुसाहट शुरू हो गई है. कल…

प्रेमचंद की परम्परा बचेगी या लप्रेक की परम्परा चलेगी

‘लप्रेक’ एक नई कथा परम्परा की शुरुआत है. लेकिन हर नई शुरुआत को अपनी परम्परा के साथ टकराना पड़ता है,…

यह हिंदी साहित्य का ‘लप्रेक’ युग है!

पहले सोचा था ‘लप्रेक’ पर नहीं लिखूंगा. कहीं रवीश जी नाराज न हो जाएँ, कहीं निरुपम जी नाराज न हो…

बर्बाद जीनियस थे(हैं) ब्रजेश्वर मदान

ब्रजेश्वर मदान को मैं तब से जानता था जब डीयू में पढ़ते हुए फ्रीलांसिंग शुरू की थी. दरियागंज में ‘फ़िल्मी…

अशोक वाजपेयी आज 74 साल के हो गए

अगर हिंदी का कोई गणतंत्र है तो वे उसकी राजधानी हैं. वे हिंदी के विकेंद्रीकरण के सबसे बड़े प्रतीक हैं.…

फौज़िया रेयाज़ की कहानी ‘पिंक का कर्ज़’

फौज़िया रेयाज़ बिलकुल आज की लेखिका हैं. आज के जेनेरेशन की सोच, भाषा, विषय- हिंदी में कहानियां कितनी बदल रही…

किंब, कांगड़ी और मेवों का मौसम

लोहड़ी को आमतौर पर पंजाबी संस्कृति का त्यौहार माना जाता है. लेकिन इस लेख में लेखिका योगिता यादव ने यह…

स्वामी विवेकानंद की जयंती पर एक प्रेरक किस्सा

आईआईटी से विज्ञान पढ़कर प्रचण्ड प्रवीर जब से गल्प की दुनिया में आये हैं तब से किस्सों की झड़ी लगा…

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Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी