स्याह पन्ने सफ़ेद किताब

आज प्रस्तुत है मनप्रीत कौर मखीजा की कहानी ‘स्याह पन्ने सफ़ेद किताब’। विभाजन, दंगे, विस्थापन यह सब कुछ ऐसा है…

जब पहाड़ रोते हैं तो मैदान भीगते हैं

नेपाल में आई भयंक बाढ़ को लेकर लिखी यह एक लेखक की डायरी है। एक ऐसे लेखक की जो भारत-नेपाल…

पोस्ट ट्रुथ क्या होता है?

हाल में युवा लेखक शहादत और अक्षत जैन ने जानी-मानी सामाज शास्त्री और इतिहासकार मीरा नंदा की किताब A Field…

प्रज्ञा विश्नोई की कहानी ‘फ़िल्म थियेटर में एक शाम’

प्रज्ञा विश्नोई समकालीन लेखकों में सबसे अलग हैं। प्रचार-प्रसार से दूर चुपचाप लेखन कर रही हैं। बहुत अलग लिखती हैं,…

गाब्रियल गार्सिया मार्केस की कहानी ‘दोपहर की नींद’

संभवतः यह गाब्रियल गार्सिया मार्केस की हिन्दी में अनूदित पहली कहानी है। इसका अनुवाद तब हुआ था जब मार्केस को…

‘सम्पा’ पर यतीश कुमार की काव्यात्मक टिप्पणी

संजीव पालीवाल और मीनाक्षी चौधरी की लिखी किताब आई है ‘सम्पा’। वेस्टलैंड से प्रकाशित इसी किताब पर अपनी विशेष काव्यात्मक…

चौक का जादूगर अमृतलाल नागर

कल हिन्दी के बड़े क़िस्सागो अमृतलाल नागर की जयंती थी। इस अवसर पर पढ़िए युवा शोधार्थी, शायर अभिषेक अम्बर का…

मेरी माँ, मेरी गैंगस्टर: निजी इतिहास में छिपा सामाजिक इतिहास

अरुंधति रे की किताब प्रभात सिंह के अनुवाद में  ‘मेरी माँ, मेरी गैंगस्टर’ जब से प्रकाशित हुई है लगातार चर्चा…

जीवन वही है जो जीने और रोने दोनों के लिए पर्याप्त है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी लक्की कुमार मिश्रा ने बहुत अच्छा लेख लिखा है। एलियनेशन पर लिखा यह लेख हम सबको…

भारतीय ज्ञान परम्परा – एक विहङ्गम दृष्टि

इस साल उन्मोचन शृंखला की पाँच पुस्तकों का प्रकाशन हुआ है। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित इन पुस्तकों में से भारत…

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