ऐसे सुहाने मौसम में और नहीं कुछ तो पीयूष मिश्रा के गीतों को ही पढ़ा जाए. 90 के दशक में…
ममता सिंह की कहानी ‘धुंध’
रेडियोसखी ममता सिंह खूबसूरत कहानियां भी लिखती हैं. अभी हाल में ही एक पत्रिका में उनकी कहानी पढ़ी- ‘धुंध’. आज…
प्रशासनिक सेवाओं में भारतीय भाषाओं के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?
यूपीएससी की परीक्षाओं में भारतीय भाषाओं के साथ भेदभाव को लेकर चल रहे आन्दोलन पर सरकारी आश्वासन एक बाद फिलहाल…
मधुकर सिंह सचमुच जनता के लेखक थे
मैं आरा को नहीं धरहरा, आरा को जानता था, क्योंकि वहां मधुकर सिंह रहते थे. अपने गाँव में रहते हुए…
आस्तीक वाजपेयी की पुरस्कृत कविता ‘विध्वंस की शताब्दी’
इस साल युवा कविता का भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार आस्तीक वाजपेयी को उनकी कविता ‘विध्वंस की शताब्दी’ के लिए देने की घोषणा…
आत्मविस्मृति से आत्मान्वेषण की यात्रा: क्वीन
आजकल सिनेमा पर गंभीर लेख कम ही पढने को मिलते हैं. फ़िल्में आती हैं, कुछ दिन उनकी चर्चा होती है…
एक फिल्म रसिक की डायरी के कुछ अनुच्छेद
सिनेमा अन्ततः दृश्यों के माध्यम से कहानी कहने की कला है. अपनी पसंद के कुछ सिने-दृश्यों के माध्यम से युवा…
वह मेरी बेटी है वह मेरी माँ भी है.
कुछ कविताएं अपनी कला से प्रभावित करती हैं, कुछ विचारों से, कुछ अपनी सहज भावनाओं से. कलावंती की ‘बेटी’ श्रृंखला…
जोहरा सहगल का जीवन ही कला था
102 की उम्र में ज़ोहरा सहगल ने इस दुनिया के रंगमंच को अलविदा कहा. 2 साल पहले उनकी बेटी किरण…
नवजागरणकालीन हिंदी पत्रिकाओं में प्रकाशित विज्ञापनों का एक अध्ययन
जिनको यह लगता है कि हिंदी को लेकर अच्छा शोध या तो विदेश के विश्वविद्यालयों में हो रहा है या…



