\’प्रगतिशील वसुधा\’ के नए अंक में पुरुषोत्तम अग्रवाल की कहानी प्रकाशित हुई है. मूलतः आलोचक पुरुषोत्तम जी ने कविताएँ भी लिखी हैं. भाषा के धनी इस लेखक की यह कहानी मुझे इतनी पसंद आई कि पढते ही आपसे साझा करने का मन हो आया- प्रभात रंजन ============================== ‘यह मकबरा सा क्यों बना दिया है भई’ ‘सर, इसे मकबरा मत कहिए’ सागरकन्या ने प्रवीण की कम-अक्ली पर तरस खाते हुए कहा, ‘यह चेंग-चुई आर्किटेक्चर है…’ चेंग-चुई? प्रवीणजी बहुत बड़े अफसर बनने के बाद एलाट हुआ बंगला देखने आए थे। देश के बड़े सेवकों का जैसा होना चाहिए वैसा ही बंगला था।…
Author: admin
ये मेरी कविताएँ नहीं हैं, बल्कि ६०-७० के दशक के प्रसिद्ध कवि प्रभात रंजन की कविताएँ हैं. मेरे जन्म के समय ये इतने प्रसिद्ध थे कि कहते मेरे दादाजी ने उनके नाम पर ही मेरा नाम रखा था. हालांकि परिवार में इस बात को लेकर मतभेद है, क्योंकि मेरे पापा का कहना है कि मेरे दादा ने मेरा नाम आनंद मार्ग के प्रवर्तक प्रभात रंजन सरकार के नाम पर रखा था. खैर, अपने हमनाम पूर्वज कवि की कविताएँ. उनकी कोई तस्वीर नहीं मिली. पुरानी पत्रिकाओं में बहुत ढूंढने पर भी- जानकी पुल.======================================================= १.जीवन की प्यास हत आस्थालहू में लथपथपराजित सैनिक…
आज महान लेखक प्रेमचंद की जयंती है. इस अवसर उनकी लिखी फिल्म \’मजदूर\’ के बारे में दिलनवाज का यह दिलचस्प लेख- जानकी पुल. =================== कम ही लोग जानते हैं कि फिल्मों में किस्मत आजमाने प्रेमचंद कभी बंबई आए थे। बंबई पहुंचकर,जो कहानी उन्होने सबसे पहले लिखी वह ‘मजदूर’ थी। सिनेमा के लिए लिखी गई कथाकार की पहली कहानी यही थी । बंबई रूख करने का प्रश्न आर्थिक एवं रचनात्मक आश्रय से जुडा था । महानगर आने के समय प्रेमचंद की वित्तीय स्थिति डामाडोल थी,कर्ज अदाएगी के लिए पर्याप्त पूंजी पास में नहीं थी। राशि का समय पर भुगतान न…
प्रकाशन के साल भर के भीतर जिसकी तीन करोड़ से अधिक प्रतियाँ बिक गई, तकरीबन चालीस देशों में जिसके प्रकाशन-अधिकार देखते-देखते बिक गए, कुछ ही समय में यह अब तक की सबसे तेजी से बिकने वाली पेपरबैक किताब बन गई, इ. एल. जेम्स लेखिका से दुनिया की मशहूर सेलिब्रिटी बन गई- ‘टाइम’ पत्रिका ने उनको 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची का हिस्सा बना लिया- आखिर ऐसा क्या है ‘फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे’ शीर्षक उपन्यास-त्रयी में? यह एक ऐसा सवाल है जिसको लेकर दुनिया भर के अंग्रेजी भाषी पाठक-लेखक-आलोचक समुदाय में बहस छिड़ी हुई है. बहस चाहे जिस किनारे पहुंचे…
अर्शिया सत्तार भारत और अंतरराष्ट्रीय लेखकों के लिए स्थापित संगम हाउस रेजीडेंसी के संस्थापकों में से एक हैं। यूनिवर्सिटी आव शिकागो से इंडियन क्लासिकल लिट्रेचर में पीएच.डी. अर्शिया का संस्कृत की कथासरित्सागर और वाल्मिकी रामायण का अनुवाद पेंग्विन बुक्स से प्रकाशित हो चुका है। बच्चों के लिए दो किताबें लिखने के अलावा वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर की एक नामचीन लेखिका हैं। उनसे नबीना दास की खास बातचीत- prairieschooner.unl.eduमें छपे इस इंटरव्यू का अनुवाद किया है -अर्पिता शर्मा ने====================================================================संगम हाउस के बारे में कुछ बताएं।वर्ष 2007 में डी डब्ल्यू गिब्सन के साथ ‘लेडिंग हाउस (आजकल राइटर्स ओमी)’ में काम करते हुए मुझे महसूस हुआ कि भारत में भी ल ेखकों के लिए…
मनीषा कुलश्रेष्ठ किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. हमारे दौर की इस प्रमुख लेखिका का हाल में ही कथा-संग्रह आया है- ‘गन्धर्व-गाथा’. प्रस्तुत है उसी संग्रह से एक कहानी लेखिका के वक्तव्य के साथ- जानकी पुल.x==============x==================x==============x==============xभूमिकाकॉलेज के दिनों में मेरे पास एक टी – शर्ट हुआ करती थी, उस पर लिखा हुआ था ‘फ्रीक’! मेरे चचेरे बड़े भाई, जो कि चर्चित पक्षी वैज्ञानिक हैं, उन्होंने बहुत चाव से ‘गिफ्ट’ की थी और मुस्कुरा कर ‘फ्रीक’ का शाब्दिक अर्थ बताया था, “नेचर’स फ्रीक वो होते हैं जो प्रकृति के नियमों से कुछ अलग – से, विचित्र होते हैं, म्यूटेट जीन्स की वजह से या…
आज 21 जुलाई को जन्मदिन है अर्नेस्ट हेमिंग्वे का. नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिकी लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने दुनिया भर की भाषाओं के लेखकों को प्रभावित किया. न कहकर कहने की उनकी शैली में कहानियों के रहस्य दो पंक्तियों के बीच छिपे होते थे जिसे आलोचकों ने ‘हिडेन फैक्ट’ की तकनीक के नाम से जाना. वह मितकथन का लेखक था. मानीखेज़ चुप्पियों के इस अप्रतिम लेखक की एक छोटी सी कहानी यहाँ प्रस्तुत है जिसमें उनकी यह तकनीक देखी-पहचानी जा सकती है- जानकी पुल.==============================================================एक लेखिका लिखती हैअपने शयन कक्ष में मेज़ पर अखबार खोले बैठी वह खिडकी से बाहर बर्फबारी देख…
राजेश खन्ना को \’प्रभात खबर\’ के पत्रकार पुष्य मित्र की यह श्रद्धांजलि पसंद आई तो आपसे साझा कर रहा हूं- जानकी पुल. ====================================================================== एबीपी न्यूज पर फिल्म सफर का गाना बज रहा है.. हिंदी सिनेमा के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना की अंतिम यात्र चल रही है और ..जिंदगी का सफर, है ये कैसा सफर.. गाने की खून जमा देने वाली धुन को सुनते हुए मैं यह आलेख लिख रहा हूं. आज सुबह उनकी फिल्म रोटी देखी है जो जी सिनेमा पर दिखायी जा रही थी और कल रात अराधना के कुछ टुकड़े सैट मैक्स पर देखने का मौका मिला. कल दोपहर…
युवा कवि त्रिपुरारि कुमार शर्मा की कविता. इसके बारे में अलग से कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है, कविता अपने आप में सब बयान कर देती है- जानकी पुल.=========================================================गुवाहाटी के गले से चीख निकली है चीख, जिसमें दर्द है, घुटन भी है चीख, जिसमें रेंगती चुभन भी है चीख, जिसमें सर्द-सी जलन भी है चीख, जिसमें लड़की का बदन भी हैउस चीख के सन्नाटे में महसूस करता हूँ कि मोहल्ले की सभी लड़कियाँ असुरक्षित हैं बोझ से झुक रहा है मेरा माथा माथे से काले धुएँ का एक ‘सोता’ फूट पड़ा हैमैं शर्मिंदा हूँ अपने कानों पर मुझे झूठे लगते हैं उस मुँह…