Atlasbet girişmeritkingmeritking girişromabetromabet girişrestbetrestbet girişalobetalobet girişmavibetmavibet girişmatbetmatbet girişMillibahis girişjasminbet girişpokerklaspokerklas girişperabetperabet girişmeritkingmeritking girişmeritkingmeritking girişperabet girişpokerklas girişromabet girişrestbet girişalobet girişmatbet girişmatbet girişmavibet girişmeritkingmeritking girişmarsbahismarsbahis girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişRoyalbetRoyalbet girişJokerbetJokerbet girişVegabetVegabet girişMeybetMeybet girişBetbigoBetbigo girişPrensbetPrensbet girişKalebetKalebet girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişRoyalbetRoyalbet girişJokerbetJokerbet girişVegabetVegabet girişPrensbetPrensbet girişMeybetMeybet girişAtlasbet girişBetbigoBetbigo girişEditörbetEditörbet girişBahiscasinoBahiscasino girişEnjoybetEnjoybet girişRoketbetRoketbet girişBetbigoBetbigo girişKalebetKalebet girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişRoyalbetRoyalbet girişJokerbetJokerbet girişVegabetVegabet girişPrensbetPrensbet girişMeybetMeybet girişAtlasbetAtlasbet giriştophillbettophillbet girişroyalbetroyalbet girişnorabahisnorabahis girişgalabetgalabet girişeditörbeteditörbet girişamgbahisamgbahis girişefesbet girişmasgterbettingmasgterbetting girişperabetperabet girişpokerklaspokerklas girişromabetromabet girişrestbetrestbet girişalobetalobet girişmatbetmatbet girişmatbetmatbet girişmavibetmavibet girişmeritkingmeritking girişmeritkingmeritking girişmarsbahismarsbahis girişBetbigoBetbigo girişKalebetKalebet girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişRoyalbetRoyalbet girişJokerbetJokerbet girişVegabetVegabet girişmeritkingmeritking girişholiganbetholiganbet girişmatbetmatbet girişmavibetmavibet girişmarsbahismarsbahis girişkavbetkavbet girişmeritkingmeritking girişMillibahisMillibahis girişjasminbetjasminbet girişMeybetMeybet girişAtlasbetAtlasbet girişefesbetefesbet girişamgbahisamgbahis girişromabetromabet girişpokerklaspokerklas girişmillibahismillibahis girişbetzulabetzula girişaresbetaresbet girişmasterbettingmasterbetting girişatmbahisatmbahis girişbetplaybetplay girişbetgarbetgar girişbetnisbetnis girişBetbigoBetbigo girişKalebetKalebet girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişJokerbetJokerbet girişVegabetVegabet girişmeritkingmeritking girişmarsbahismarsbahis girişmavibetmavibet girişmatbet girişkavbetkavbet girişMeritkingMeritking girişMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Giriş AdresiMeritking Giriş: Meritking Canlı Destek Ve İletişimMarsbahis Giriş: Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Bonus Ve Kampanyalar, Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Mobilden Giriş 2026, Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Canlı Destek Ve İletişimMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarBetbigoBetbigo girişKalebet girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişRoyalbet girişMeybet girişAtlasbet girişEnbet girişBetzula girişRomabetRomabet girişaresbetaresbet girişamgbahisamgbahis girişatmbahisatmbahis girişbetzulabetzula girişpokerklaspokerklas girişefesbetefesbet girişmillibahismillibahis girişbetplaybetplay girişbetnisbetnis girişbetgarbetgar girişMeritking Giriş: Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Canlı Destek Ve İletişimpokerklaspokerklas girişmillibahismillibahis girişaresbetaresbet girişbetplaybetplay girişhttps://extraordinaryethiopiatours.com/https://extraordinaryethiopiatours.com/ girişMeritking Giriş: Meritking Bonus Ve Kampanyalar, Meritking Güvenilir MiMarsbahis Giriş: Marsbahis Mobilden Giriş 2026, Marsbahis Güvenilir MiMavibet Giriş: Mavibet Canlı Destek Ve İletişimCeltabetCeltabet girişEditörbetEditörbet girişEnjoybetEnjoybet girişRomabetRomabet girişGalabetGalabet girişBahiscasinoBahiscasino girişCasinoroyalCasinoroyal girişBetkolikBetkolik girişNorabahisNorabahis girişHiltonbetHiltonbet girişPadişahbetPadişahbet girişGrandbettingGrandbetting girişBetplayBetplay girişmarsbahismarsbahis girişfestwinpokerklaspokerklas girişmillibahismillibahis girişaresbetaresbet girişbetplaybetplay girişbetgarbetgar girişbetnisbetnis girişefesbetefesbet girişrestbetrestbet girişsonbahissonbahis girişelitcasinoelitcasino girişfestwing girişmarsbahis güncel girişfestwin güncel girişholiganbetholiganbet girişholiganbet güncel girişmavibetmavibet girişmavibet güncel girişMeritking Giriş: Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve Kampanyalarmeritkingmeritking girişBetbigoBetbigo girişKalebetKalebet girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişRoyalbetRoyalbet girişJokerbetJokerbet girişVegabetVegabet girişMeybetMeybet girişAtlasbetAtlasbet girişMeritkingMeritking girişMarsbahisMarsbahis girişMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Spor Bahislerimatbetmatbet girişmeritkingmeritking girişmarsbahismarsbahis girişholiganbetholiganbet girişmeritkingmeritking girişmarsbahismarsbahis girişmavibetmavibet girişMeritking Giriş: Meritking Mobilden Giriş 2026Marsbahis Giriş: Marsbahis Bonus Ve KampanyalarMavibet Giriş: Mavibet Casino Ve Slot Oyunları, Mavibet Mobilden Giriş 2026
  • ब्लॉग
  • बाबू कुंवर सिंह तोहरे राज बिना…

    1857 के जुबानी किस्से

    अभी हाल में ही रूपा एंड कंपनी से इतिहासकार पंकज राग की पुस्तक आई है 1857 ओरल ट्रेडिशन पुस्तक में उन्होंने लोकगीतों एवं किस्से-कहानियों के माध्यम से 1857 के विद्रोह को समझने का प्रयास किया है। प्रस्तुत है उसका एक छोटा-सा अंश जिसका संबंध कुंवर सिंह से जुडे किस्सों से है।



    आम जनता के मानस में इस विद्रोह में भाग लेना जीवन और मृत्यु के कर्मों में भाग लेने से कम आवश्यक कर्म नहीं था। ऐसे अनेक लोकगीत हैं जिनमें इस बात का वर्णन मिलता है कि किस तरह राजा कुंवर सिंह और उनके छोटे भाई अमर सिंह युद्ध की तैयारी अनुष्ठानपूर्वक किए गए स्नान और शरीर पर चंदन का लेप लगाकर करते थे, यहां तक कि पंडित बुलाकर लड़ाई पर जाने का शुभ मुहुर्त भी पूछते थेः

    सिर से गुसुल किया बनाई

    चनन लगौलन आठों अंग

    वर्दी पेटी ले मंगाओ

    झालम झार ले मंगाओ

    या

    ई बाबू ने जोर किया

    पंडितजी को लिए बुलाए

    सुनो पंडितजी मेरी बात

    सगुन दो बिचार

    इसी तरह, लड़ाई के अंतिम दौर में गंगा नदी पार करते हुए तोप का गोला लगने से कुंवर सिंह का एक हाथ बेकामिल हो गया। ऐसा कहा जाता है कि अपनी तलवार के एक झटके में ही उन्होंने अपना वह घवाहिल हाथ उतारकर पवित्र नदी गंगा को अंतिम प्रणाम स्वरूप भेंट कर दियाः

    रामा गोली आई लागल दहिना हथवा ना

    रामा काटि दिहले लेके तरवरवा रे ना

    रामा वीर भगत के इहे निशनवा रे ना

    एक दिलचस्प उदाहरण गोरखपुर के डुमरी एस्टेट के बंधु सिंह का है। 1857 में उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ छापामार लड़ाई लड़ी और ऐसा माना जाता है कि वे अंग्रेजों के कटे हुए सिर तड़कुल्हा गांव की देवी तड़कुल्हा देवी को चढ़ाते थे। किस्से-कहानियों में कहा जाता है कि आखिरकार जब वे पकड़े गए तथा 12 अगस्त 1857 को गोरखपुर के अलीनगर चौराहे पर जब उनको फांसी पर चढ़ाया जा रहा था तो जल्लाद की रस्सी सात बार टूट गई थी। आखिरकार जब उसने तड़कुल्हा देवी से विनती की कि वे बंधु सिंह को शहीद मान लें तब उसको फांसी पर लटकाया जा सका। उस तरफ के लोग तो आज तक यह मानते हैं कि जिस उसे फांसी पर चढ़ाया गया था उस दिन आसपास के इलाके में ताड़ के सात पेड़ गिरे थे जो सात बार रस्सी टूटने के प्रतीक थे। देवी के मंदिर के पीछे वाला पोखर लाल हो गया था उस दिन। 1857 के संदर्भ में बहादुरी और विद्रोह धार्मिक आस्था और विश्वासों के भी निर्धारक पहलू हो गए।

    1857 के संदर्भ में धर्म का मतलब भी अलग-अलग जगहों पर लोगों के लिए अलग-अलग हो जाता था। 19वीं शतब्दी के मध्य में भारत में धर्म का मतलब अधिक विस्तृत था और उसके अंतर्गत नैतिक और सामाजिक मूल्यों से जुड़े समस्त पहलू आते थे। इसके अंतर्गत वे सारे आचार-विचार आते थे जिनके अनुसार जीवन को संचालित किया जाना चाहिए। इसलिए धर्म रक्षा का मतलब होता था समस्त जीवन पद्धति की रक्षा, 1857 के संदर्भ में जिसका अर्थ हो सकता था उन अपराधियों के खिलाफ लड़ना जो इस धर्म को हानि पहुंचा रहे थे।

    आम जन चेतना में मर्दानगी तथा वीरता से जुड़े पहलू इस प्रकार की जीवन पद्धति की रक्षा से जुड़ गए। जो लोग घर में आराम से पड़े हुए थे और जिन्होंने संघर्ष का रास्ता अपनाने से मना कर दिया उनका मज़ाक उड़ाया जाता था। जैसा नीचे की पंक्तियों में औरतें ऐसे कायरों का उपहास इस तरह से करती हैं-

    लागे शरम लाज घर में बैठ जाहू

    मरद से बनि के लुगइया ए हरि

    पहिरके साड़ी; चूड़ी; मुँहवा छिपाई लेहु

    राखि लेबि तोहरी पगड़िया ए हरि।

    1857 के संदर्भ में इस प्रकार के सम्मान का भाव समाज के विभिन्न तबकों में देखा जा सकता है। पटना के प्रसिद्ध विद्रोही पीर अली से जब अंग्रेजों ने गिरफ्तारी के बाद यह कहा कि अगर वे विद्रोहियों के बारे में कुछ जानकारी दें तो उनकी जान बख्श दी जाएगी। कहा जाता है कि जवाब में उसने कहा कि कुछ मामलों में जान बचाना अच्छा होता है लेकिन कुछ मामलों में जान देना ही बेहतर होता है। जो लोग उस लड़ाई का हिस्सा थे लोगों की नजर में वे सम्मान के लिए एक आवश्यक लड़ाई लड़ रहे थे। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जब लोगों ने विद्रोहियों को पकड़ने में सरकार की मदद करने से इंकार कर दिया।

    सम्मान की इस लड़ाई में शक्ति अर्जित करने के लिए मर्दानगी और वीरता से जुड़े सांस्कृतिक पहचानों का सहारा भी लिया गया। सांस्कृतिक मुहावरों एवं पहचानों के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई शायद अलग सांस्कृतिक वितान की धारणा को पुष्ट करता है, विद्रोही जिसे अंग्रेजों के अतिक्रमण से बचाने का प्रयास कर रहे थे। इसीलिए कुंवर सिंह की हार ने आम विद्रोहियों को यह कहने के लिए विवश किया कि उनमें होली खेलने की जरा भी इच्छा नहीं रह गई हैः

    बाबू कुंवर सिंह तोहरे राज बिना,

    अब न रंगइबो केसरिया।

    4 thoughts on “बाबू कुंवर सिंह तोहरे राज बिना…

    1. Pingback: ufabtb

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    \"\"

    1857 के जुबानी किस्से

    अभी हाल में ही रूपा एंड कंपनी से इतिहासकार पंकज राग की पुस्तक आई है 1857 ओरल ट्रेडिशन पुस्तक में उन्होंने लोकगीतों एवं किस्से-कहानियों के माध्यम से 1857 के विद्रोह को समझने का प्रयास किया है। प्रस्तुत है उसका एक छोटा-सा अंश जिसका संबंध कुंवर सिंह से जुडे किस्सों से है।



    आम जनता के मानस में इस विद्रोह में भाग लेना जीवन और मृत्यु के कर्मों में भाग लेने से कम आवश्यक कर्म नहीं था। ऐसे अनेक लोकगीत हैं जिनमें इस बात का वर्णन मिलता है कि किस तरह राजा कुंवर सिंह और उनके छोटे भाई अमर सिंह युद्ध की तैयारी अनुष्ठानपूर्वक किए गए स्नान और शरीर पर चंदन का लेप लगाकर करते थे, यहां तक कि पंडित बुलाकर लड़ाई पर जाने का शुभ मुहुर्त भी पूछते थेः

    सिर से गुसुल किया बनाई

    चनन लगौलन आठों अंग

    वर्दी पेटी ले मंगाओ

    झालम झार ले मंगाओ

    या

    ई बाबू ने जोर किया

    पंडितजी को लिए बुलाए

    सुनो पंडितजी मेरी बात

    सगुन दो बिचार

    इसी तरह, लड़ाई के अंतिम दौर में गंगा नदी पार करते हुए तोप का गोला लगने से कुंवर सिंह का एक हाथ बेकामिल हो गया। ऐसा कहा जाता है कि अपनी तलवार के एक झटके में ही उन्होंने अपना वह घवाहिल हाथ उतारकर पवित्र नदी गंगा को अंतिम प्रणाम स्वरूप भेंट कर दियाः

    रामा गोली आई लागल दहिना हथवा ना

    रामा काटि दिहले लेके तरवरवा रे ना

    रामा वीर भगत के इहे निशनवा रे ना

    एक दिलचस्प उदाहरण गोरखपुर के डुमरी एस्टेट के बंधु सिंह का है। 1857 में उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ छापामार लड़ाई लड़ी और ऐसा माना जाता है कि वे अंग्रेजों के कटे हुए सिर तड़कुल्हा गांव की देवी तड़कुल्हा देवी को चढ़ाते थे। किस्से-कहानियों में कहा जाता है कि आखिरकार जब वे पकड़े गए तथा 12 अगस्त 1857 को गोरखपुर के अलीनगर चौराहे पर जब उनको फांसी पर चढ़ाया जा रहा था तो जल्लाद की रस्सी सात बार टूट गई थी। आखिरकार जब उसने तड़कुल्हा देवी से विनती की कि वे बंधु सिंह को शहीद मान लें तब उसको फांसी पर लटकाया जा सका। उस तरफ के लोग तो आज तक यह मानते हैं कि जिस उसे फांसी पर चढ़ाया गया था उस दिन आसपास के इलाके में ताड़ के सात पेड़ गिरे थे जो सात बार रस्सी टूटने के प्रतीक थे। देवी के मंदिर के पीछे वाला पोखर लाल हो गया था उस दिन। 1857 के संदर्भ में बहादुरी और विद्रोह धार्मिक आस्था और विश्वासों के भी निर्धारक पहलू हो गए।

    1857 के संदर्भ में धर्म का मतलब भी अलग-अलग जगहों पर लोगों के लिए अलग-अलग हो जाता था। 19वीं शतब्दी के मध्य में भारत में धर्म का मतलब अधिक विस्तृत था और उसके अंतर्गत नैतिक और सामाजिक मूल्यों से जुड़े समस्त पहलू आते थे। इसके अंतर्गत वे सारे आचार-विचार आते थे जिनके अनुसार जीवन को संचालित किया जाना चाहिए। इसलिए धर्म रक्षा का मतलब होता था समस्त जीवन पद्धति की रक्षा, 1857 के संदर्भ में जिसका अर्थ हो सकता था उन अपराधियों के खिलाफ लड़ना जो इस धर्म को हानि पहुंचा रहे थे।

    आम जन चेतना में मर्दानगी तथा वीरता से जुड़े पहलू इस प्रकार की जीवन पद्धति की रक्षा से जुड़ गए। जो लोग घर में आराम से पड़े हुए थे और जिन्होंने संघर्ष का रास्ता अपनाने से मना कर दिया उनका मज़ाक उड़ाया
    जाता था। जैसा नीचे की पंक्तियों में औरतें ऐसे कायरों का उपहास इस तरह से करती हैं-

    लागे शरम लाज घर में बैठ जाहू

    मरद से बनि के लुगइया ए हरि

    पहिरके साड़ी; चूड़ी; मुँहवा छिपाई लेहु

    राखि लेबि तोहरी पगड़िया ए हरि।

    1857 के संदर्भ में इस प्रकार के सम्मान का भाव समाज के विभिन्न तबकों में देखा जा सकता है। पटना के प्रसिद्ध विद्रोही पीर अली से जब अंग्रेजों ने गिरफ्तारी के बाद यह कहा कि अगर वे विद्रोहियों के बारे में कुछ जानकारी दें तो उनकी जान बख्श दी जाएगी। कहा जाता है कि जवाब में उसने कहा कि कुछ मामलों में जान बचाना अच्छा होता है लेकिन कुछ मामलों में जान देना ही बेहतर होता है। जो लोग उस लड़ाई का हिस्सा थे लोगों की नजर में वे सम्मान के लिए एक आवश्यक लड़ाई लड़ रहे थे। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जब लोगों ने विद्रोहियों को पकड़ने में सरकार की मदद करने से इंकार कर दिया।

    सम्मान की इस लड़ाई में शक्ति अर्जित करने के लिए मर्दानगी और वीरता से जुड़े सांस्कृतिक पहचानों का सहारा भी लिया गया। सांस्कृतिक मुहावरों एवं पहचानों के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई शायद अलग सांस्कृतिक वितान की धारणा को पुष्ट करता है, विद्रोही जिसे अंग्रेजों के अतिक्रमण से बचाने का प्रयास कर रहे थे। इसीलिए कुंवर सिंह की हार ने आम विद्रोहियों को यह कहने के लिए विवश किया कि उनमें होली खेलने की जरा भी इच्छा नहीं रह गई हैः

    बाबू कुंवर सिंह तोहरे राज बिना,

    अब न रंगइबो केसरिया।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    1 mins
    WordPress Center Ankara Escort: Beypazarı Escort, Pursaklar Escort, Etimesgut Escort İstanbul Escort: Esenyurt Escort, Bahçelievler Escort, Maltepe Escort Bursa Escort: Gürsu Escort, Keles Escort, İznik Escort What are the best budget smartphones available in 2025? Reason Why Everyone Love Travel Doubts About Lifestyle You Should Clarify WebViewGold for iOS | Convert website to iOS app | No Code, Push, URL Handling & much more! Team Grid – Team Member Showcase WordPress Plugin & Team Editor Ultimate Bundle Two for WPBakery Page Builder (formerly Visual Composer) WooCommerce Composite Products | WooCommerce Product Bundles eShop Web – Multi Vendor eCommerce Marketplace / CMS Custom Fields & Options Plugin for WordPress – Xbox Framework AtoZ SEO Tools – Search Engine Optimization Tools Teamber | Team Member Collection for Elementor WooCommerce Customer Specific Pricing Plugin EXA Navigator – Fullscreen Menu for Elementor