कभी ‘नक़्श’ दिल का कहा तो करो

‘नक़्श’ लायलपुरी एक ऐसे शायर हैं जिन्होंने फिल्मों में भी कई अर्थपूर्ण गीत लिखे. आज उनकी कुछ चुनिन्दा ग़ज़लें- मॉडरेटर.…

अलका सरावगी के नए उपन्यास का अंश

अलका सरावगी के उपन्यासों में बतकही के अंदाज में हमारे समय का जटिल यथार्थ बहुत सहजता से आता है. मेरे…

दशरथ माझी के जीवन पर आधारित उपन्यास का अंश

 पिछले दिनों एक खबर आई कि एक प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक ने दशरथ माझी के जीवन पर आधारित फिल्म बनाई है.…

विचारधारा प्रतिभा को पुष्ट-सशक्त कर सकती है, उसे नष्ट भी- अशोक वाजपेयी

कल श्री गिरिराज किराडू ने हमारी भाषा के वरिष्ठ कवि-आलोचक-संपादक श्री अशोक वाजपेयी को उनकी बातों के सन्दर्भ में स्पष्टीकरण…

‘प्रतिलिपि’ ने किताबों के प्रकाशन के लिए वित्तीय मदद मांगी थी– अशोक वाजपेयी

श्री अशोक वाजपेयी का यह ईमेल हमें प्राप्त हुआ है जिसमें उन्होंने ‘प्रतिलिपि बुक्स’ को लेकर कुछ बातों को स्पष्ट…

हर तरह की हत्या को ख़ारिज करती है मेरी कविता

समकालीन हिंदी कविता की एक मुश्किल यह है कि वह ‘पोलिटिकली करेक्ट’ होने के प्रयास में अधिक रहती है, लेकिन…

जो कम्यूनिस्ट नहीं है, उसे कम्यूनिस्ट विरोधी होने का हक है

‘कथादेश’ के जून 2013 के अंक में प्रसिद्ध लेखिका-आलोचिका अर्चना वर्मा का लेख प्रकाशित हुआ है ‘असहमति और विवाद की संस्कृति’ शीर्षक…

ये भी कोई जाने की उम्र होती है- दीप्ति नवल

ऋतुपर्णो घोष का जाना सचमुच अवाक कर गया. साहित्य और सिनेमा के खोये हुए रिश्ते को जोड़ने वाले इस महान निर्देशक…

मुझे देखती हैं मोनालिसा की आँखें

कुछ दिन पहले सुमन केशरी की कविताओं के संकलन ‘मोनालिसा की आँखें’ का विमोचन हुआ. सुमन जी शब्दों को इतनी आत्मीयता के…

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