भूपेन्द्र बिष्ट की कविताएँ

आज प्रस्तुत है भूपेन्द्र बिष्ट की कविताएँ जिनमें से कुछ पहाड़ पर बसे व्यक्तियों के संघर्ष की अभिव्यक्ति है तो…

‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ की एक आरंभिक समीक्षा

विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ की यह समीक्षा उपन्यास की आरंभिक समीक्षाओं में है…

इस प्रकार की बहस हो तो माहौल ज़रूर बदलेगा और लोगों का नज़रिया भी!

‘लल्लनटॉप’ पर ‘does god exist’ वाली बहस पर बहुत प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। आज पढ़िए युवा वर्ग की प्रतिक्रिया, लिखा…

फ़ालतू तो दूर मुझ में तो बेफ़ालतू भी अक़्ल नहीं!

पुलिस अफ़सर शायर सुहैब अहमद फ़ारूक़ी ने लल्लनटॉप पर ईश्वर को लेकर चली बहस की पृष्ठभूमि में यह टीप लिखी…

हृषीकेश सुलभ के उपन्यास ‘जूठी गली’ का एक अंश

हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार, उपन्यासकार, नाटककार हृषीकेश सुलभ का नया उपन्यास आया है ‘जूठी गली’। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस…

कौस्तुभ उपाध्याय की कुछ कविताएँ

आज पढ़िए कौस्तुभ उपाध्याय की ग़ज़लनुमा कुछ कविताएँ।कौस्‍तुभ उपाध्याय मूलतः पत्रकार हैं और आजकल इंडिया वॉटर पोर्टल में सीनियर एडिटर…

होमबाउंड: भारतीय सिनेमा, वैश्विक स्वीकृति और ‘घर’ की खोज

फ़िल्म ‘होमबाउंड’ बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फ़िल्म के वर्ग में शॉर्टलिस्ट हुई है। यह एक बड़ी घटना है। इसी को केंद्र…

अदम गोंडवी की कुछ ग़ज़लें

अदम गोंडवी हिंदुस्तानी ग़ज़ल का ऐसा शायर है जो अपनी शाइरी में प्यार-मुहब्बत, हिज्र-विसाल जैसे मौज़ूआत को छोड़ कर आम जनमानस…

आपने ‘द फ़ैमिली मैन’  का तीसरा सीजन देखा है?

मनोज वाजपेयी अभिनीत ‘द फ़ैमिली मैन‘, सीजन 3 पर यह टिप्पणी लिखी है युवा लेखक मुशर्रफ परवेज़ ने। आप भी…

‘जेपी से बीजेपी’ पुस्तक का एक अंश

पटना पुस्तक मेले में गया तो संतोष सिंह की किताब ‘जेपी से बीजेपी: सौ साल के आईने में बिहार’ की…

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Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी