डॉ. वीरेन्द्र प्रसाद अर्थशास्त्र एवं वित्तीय प्रबंधन में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है और वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी…
आलमशाह खान का कथा लेखन अविस्मरणीय – असग़र वजाहत
1970-1980 के दशक में आलमशाह खान की कहानियों की धूम थी। उस समय की लोकप्रिय पत्रिका ‘सारिका’ में उनकी एक…
मौत के साये में जीवन कथा
आशुतोष भारद्वाज की पुस्तक ‘मृत्यु कथा’ पर यह टिप्पणी लिखी है दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय की शोधार्थी अनु रंजनी ने।…
शब्दों के बीच दालचीनी की ख़ुशबू बिखरी है!
आज पढ़िए चर्चित युवा कवयित्री अनामिका अनु के कविता संग्रह ‘इंजीकरी’ पर यतीश कुमार की यह टिप्पणी। और हां,…
‘जौन एलिया का जिन’ नाटक की समीक्षा
हाल में ही इरशाद खान सिकंदर का नाटक आया है ‘जौन एलिया का जिन’। राजपाल एंड संज से प्रकाशित…
पीटी ऊषा उर्फ मैडम बहुत सख्त हैं!
यौन शोषण के विरुद्ध जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रही महिला पहलवानों के संदर्भ में पीटी उषा के बयान के…
जया प्रसाद की पुस्तक ‘श्री सिद्धि माँ’ का एक अंश
नीम करौली बाबा को सब जानते हैं। सिद्धि माँ के बारे में आप जानते हैं? जया प्रसाद की किताब ‘श्री…
सारंग उपाध्याय के उपन्यास ‘सलाम बॉम्बे व्हाया वर्सोवा डोंगरी’ का एक अंश
मुंबई को लेकर सारंग उपाध्याय ने कुछ बेजोड़ कहानियाँ लिखी हैं। अभी हाल में ही मुंबई की पृष्ठभूमि पर…
ये दिल है कि चोर दरवाज़ा : मुख्य दरवाज़े की प्रस्तावना और उपसंहार भी
इस साल एक उल्लेखनीय कथा संकलन आया है ‘ये दिल है कि चोर दरवाजा‘। किंशुक गुप्ता द्वारा लिखी समलैंगिक रिश्तों…
‘पारा-पारा’ पर यतीश कुमार की काव्यात्मक टिप्पणी
यतीश कुमार अर्से बाद अपनी काव्यात्मक टिप्पणी के साथ लौटे हैं। इस बार उनको चुना है प्रत्यक्षा के उपन्यास ‘पारा-पारा’…



